Saraikela : अतुल्य भारत श्रृंखला (इंटेंजिबुल हेरिटेज) में शामिल सरायकेला छऊ नृत्य शैली की बारीकियों को समझने सोमवार को राजनगर की ऐतिहासिक धरती पर फ्रांसीसी मेहमान 75 वर्षीय जिज़ेल बुसों पहुंची. जो अपने भारत प्रवास के दौरान राजनगर स्थित ऐतिहासिक ईचा पैलेस एवं लगभग 250 वर्ष प्राचीन श्रीरघुनाथ मंदिर का भ्रमण किया. इस दौरान


ईचा राजपरिवार द्वारा पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया गया. इस मौके पर उन्होंने ऐतिहासिक विरासत की जानकारी ली और छऊ नृत्य की बारीकियों को जाना. छऊ नृत्य ने विदेशी अतिथि को मंत्रमुग्ध कर दिया. मौके पर उन्होंने ईचा की संस्कृति, इतिहास और अतिथि सत्कार को अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया. बता दें कि यह दौरा छऊ और ईचा की पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई ऊँचाई प्रदान करेगा. बता दें कि सरायकेला छऊ नृत्य ने कई दशकों में दर्जनों नहीं, बल्कि कई प्रमुख कलाकारों को पद्मश्री से सम्मानित कराया है. जिनमें शुभेंदु नारायण सिंहदेव, केदारनाथ साहू, श्यामाचरण पति, मंगलाचरण पति, मकरध्वज दारोघा, गोपाल प्रसाद दुबे और शशधर आचार्य शामिल हैं, जिन्होंने इस कला को देश-विदेश में पहचान दिलाई. कई तो अब नहीं रहे, लेकिन उनके योगदान ने छऊ को ऊंचाइयों पर पहुँचाया है. खासकर शशधर आचार्य को 2020 में पद्मश्री मिला, जो इस शैली के लिए सातवें गुरु थे.

