जमशेदपुर:- नगर निगम चुनाव के तहत मेयर पद के लिए उतरे प्रत्याशियों की शैक्षणिक योग्यता और घोषित संपत्ति का आंकड़ा इस बार कई चौंकाने वाले तथ्य सामने ला रहा है, जिससे यह साफ हो गया है कि यह चुनाव केवल राजनीतिक दलों की नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक विविधता की भी असली तस्वीर पेश कर रहा है। प्रत्याशियों की शिक्षा जहां मैट्रिक, इंटर, स्नातकोत्तर, पीजी, एमबीए और एलएलबी तक फैली हुई है, वहीं उनकी संपत्ति के आंकड़े करोड़ों रुपये से लेकर महज कुछ हजार रुपये तक भी सिमटे हुए हैं। मानगो नगर निगम क्षेत्र में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी सुधा गुप्ता मैट्रिक पास होने के बावजूद 3.65 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ सबसे अमीर उम्मीदवारों में शामिल हैं, जबकि एमबीए शिक्षित वनीता सहाय ने 1.24 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है। इंटर पास संध्या सिंह 2.30 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ मजबूत आर्थिक स्थिति में नजर आती हैं, वहीं एमए-बीएड जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यता रखने वाली सायस्ता परवीन की कुल संपत्ति 46.46 लाख रुपये दर्ज है। पीजी शिक्षित कुमकुम श्रीवास्तव ने 38.48 लाख रुपये की संपत्ति दिखाई है, जबकि इंटर पास रायमुनी मुंडी के पास 20 लाख रुपये की संपत्ति बताई गई है। साक्षर लवकी सिंह ने 12.02 लाख रुपये, इंटर शिक्षित जेबा कादरी ने 11.10 लाख रुपये और स्नातकोत्तर प्रतिमा रानी ने 4.75 लाख रुपये की संपत्ति घोषित की है, वहीं एलएलबी शिक्षित सोनामुनी सोरेन की संपत्ति 6.73 लाख रुपये दर्ज की गई है। इसके ठीक उलट तस्वीर भी सामने आई है जहां निरक्षर इंदिरा मुंडी की कुल संपत्ति महज 70 हजार रुपये है, नन-मैट्रिक पार्वती देवी के पास केवल 20 हजार रुपये और अनपढ़ सुशीला सिंह के पास सिर्फ 16 हजार रुपये की संपत्ति दर्ज है, जो चुनावी खर्च और संसाधनों के लिहाज से बड़ा अंतर दिखाती है। शिक्षा और संपत्ति के इस तुलनात्मक विश्लेषण से यह भी साफ होता है कि अधिक शिक्षित होना जरूरी नहीं कि अधिक संपन्न होने की गारंटी हो और कम शिक्षित प्रत्याशी भी करोड़ों की संपत्ति के साथ राजनीतिक ताकत दिखा रहे हैं, ऐसे में मतदाताओं के सामने सवाल सिर्फ डिग्री या धन का नहीं बल्कि ईमानदारी, जनसरोकार और प्रशासनिक समझ का बनकर खड़ा हो गया है, जो इस चुनाव को बेहद दिलचस्प और निर्णायक बना रहा है ।



