वाहन फाइनेंस घोटाले में नया मोड़: गवाह बने आरोपी, दो को अदालत से जमानत

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जमशेदपुर: वर्ष 2019 में प्रकाश में आए वाहन फाइनेंस घोटाले में एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। इस मामले में प्रारंभिक जांच के दौरान जिन व्यक्तियों को गवाह बनाया गया था, उन्हें वर्तमान में आरोपी के रूप में नामित किया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार, कुछ लोगों द्वारा “पर्सनल लोन उपलब्ध कराने” के नाम पर आवेदकों को प्रलोभन देकर उनके नाम पर वाहनों का फाइनेंस कराया जाता था। इसके पश्चात उक्त वाहनों को अन्य व्यक्तियों के पास गिरवी रख दिया जाता था। मामले का खुलासा होने के बाद कई लोग इससे प्रभावित पाए गए।

इस संबंध में प्रह्लाद बेहरा द्वारा परसुडीह थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, जिसका केस संख्या  82 /2019 के रूप में अंकित है। जांच के क्रम में पुलिस ने लगभग 20 से 25 वाहनों की बरामदगी भी की थी। जिन व्यक्तियों के पास से वाहन बरामद हुए, उन्हें गवाह बनाया गया तथा उनके बयान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के अंतर्गत न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष दर्ज कराए गए थे।

हालांकि, वर्ष 2026 में इस प्रकरण में नया विकास सामने आया है, जिसमें उक्त गवाहों को भी आरोपी के रूप में सम्मिलित किया गया है। इस निर्णय ने विधिक क्षेत्र में चर्चा को जन्म दिया है।

इसी क्रम में, राजेश कुमार आजाद ने अपनी अधिवक्ता मिस तृषा के माध्यम से अग्रिम जमानत याचिका (A.B.P. No. 353 of 2026) दायर की। वहीं, इंदरजीत सिंह ने अधिवक्ता राहुल गोप के माध्यम से अग्रिम जमानत याचिका (A.B.P. No. 355 of 2026) प्रस्तुत की।

दोनों याचिकाओं पर सुनवाई के उपरांत ADJ-3 न्यायालय द्वारा संबंधित आरोपियों को जमानत प्रदान कर दी गई।

मामले में गवाहों को आरोपी बनाए जाने की प्रक्रिया को लेकर विभिन्न कानूनी पहलुओं पर चर्चा जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगे की सुनवाई में इस विषय पर और स्पष्टता आने की संभावना है।