झारखंड : लातेहार जिले अंतर्गत महुआडांड़ प्रखंड में सरकारी सिस्टम की पोल ऐसी खुली है कि भरोसा ही हिल जाए। गरीबों के राशन की सुरक्षा के नाम पर बना पीडीएस गोदाम अब खुद ही तबाही का अड्डा बन गया है। पहली ही बरसात में छत पर लगे करकट (टीन) उड़ने लगे, जगह-जगह से पानी झरने की तरह टपक रहा है, और अंदर रखा चावल भीगकर सड़ने की कगार पर है। सवाल सीधा है—क्या यही है सरकारी निर्माण की “गुणवत्ता”?ग्राउंड पर हालात बदतर हैं। गोदाम के अंदर पानी भर रहा है, बोरों में रखा अनाज नमी से खराब हो रहा है। जिस अनाज पर गरीबों का हक है, वही अब लापरवाही और लालच की भेंट चढ़ रहा है। यह कोई छोटी चूक नहीं, बल्कि सीधे-सीधे जनहित से खिलवाड़ है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण के वक्त ही खेल कर दिया गया था—घटिया सामग्री, अधूरा काम, और कागजों में फुल पेमेंट। न गुणवत्ता जांच, न निगरानी—बस ठेकेदार और कुछ जिम्मेदारों की मिलीभगत से “काम पूरा” दिखाकर रकम साफ।


*अब मांग तेज हो गई है*
पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांचहो,दोषी अधिकारियों और ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज हो,गोदाम की तत्काल मरम्मत कर अनाज सुरक्षित किया जाएऔर भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए जवाबदेही तय की जाए

