एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में ‘हर घर जल’ जैसी योजनाओं के तहत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर महुआडांड़ प्रखंड के पकरीपाठ गांव की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। यहां पिछले 3–4 महीनों से ग्रामीण गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहे हैं, जहां 5 में से 4 जलमीनार खराब पड़े हैं और एकमात्र चालू जलमीनार भी पर्याप्त पानी देने में असमर्थ है। बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।



