दो माह से वेतन नहीं मिलने से जलापूर्ति कर्मियों में आक्रोश, काम बंद करने की चेतावनी

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बोकारो: हेसाबातू बहु-पंचायत ग्रामीण जलापूर्ति योजना से जुड़े पंप ऑपरेटरों और अन्य कर्मचारियों को पिछले दो माह से वेतन नहीं मिलने के कारण गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन नहीं मिलने से परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है।

कर्मचारियों के अनुसार, जिस ठेकेदार के माध्यम से जलापूर्ति योजना संचालित की जा रही थी, उसका टेंडर समाप्त हो चुका है। ठेकेदार टेंडर खत्म होने का हवाला देकर बकाया वेतन देने से इंकार कर रहा है, जबकि विभाग का कहना है कि भुगतान की प्रक्रिया ठेकेदार के माध्यम से ही पूरी की जाएगी। विभाग और ठेकेदार के बीच फंसे इस विवाद का सीधा असर कर्मचारियों पर पड़ रहा है।

कर्मियों ने आरोप लगाया कि योजना शुरू होने के समय उन्हें 5 से 7 हजार रुपये मासिक वेतन पर नियुक्त किया गया था और भविष्य में वेतन बढ़ाने का आश्वासन भी दिया गया था। लेकिन पिछले पांच वर्षों में वेतन में कोई वृद्धि नहीं हुई। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें आज भी सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी के अनुरूप भुगतान नहीं मिल रहा है।

यह योजना गोडाबाली उत्तर, गोडाबाली दक्षिण, मराफारी, नरकारा, हेसाबातू पूर्व, हेसाबातू पश्चिम, बांसगोड़ा पूर्व, बांसगोड़ा पश्चिम, रितुदीह और सतनपुर पंचायतों सहित आसपास के क्षेत्रों के 80 हजार से अधिक लोगों को पेयजल उपलब्ध कराती है। इसके बावजूद योजना से जुड़े कर्मियों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।

लगातार दो माह से वेतन लंबित रहने के कारण कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया तो वे काम बंद करने को मजबूर होंगे, जिससे हजारों परिवारों की पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। कर्मचारियों ने विभाग और संबंधित एजेंसियों से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।