बकाया वेतन अवमानना मामले में झारखंड हाईकोर्ट सख्त, 24 जून तक भुगतान का आदेश

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झारखंड हाईकोर्ट ने बकाया वेतन भुगतान से जुड़े अवमानना मामले में राज्य सरकार के अधिकारियों के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश एम.एस. रामचंद्र राव और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता समीना खातून के दिवंगत पति के 9 सितंबर 1997 से 31 मार्च 2000 तक के बकाया वेतन का भुगतान 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 24 जून 2026 तक सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित तिथि तक भुगतान नहीं होने पर लोहरदगा के जिला शिक्षा पदाधिकारी, माध्यमिक शिक्षा निदेशक और स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव को 25 जून को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होना होगा। साथ ही उन्हें यह भी बताना होगा कि जून 2026 का वेतन रोकने का आदेश क्यों नहीं पारित किया जाए।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने संबंधित अवधि के नमूना रोल पर हस्ताक्षर उपलब्ध नहीं होने का तर्क दिया, जिस पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा कि यह तर्क पूर्व की किसी भी सुनवाई में नहीं उठाया गया था और अब इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने सरकार के रवैये को प्रथम दृष्टया अवमाननापूर्ण बताते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के पति को जीवनकाल में न्याय नहीं मिला और अब उनकी विधवा को भी वैध भुगतान से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई 25 जून को होगी।