जमशेदपुर: टाटा स्टील और ब्रिटेन की रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग ने रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए तीन साल की नई साझेदारी की घोषणा की है। इस पहल के तहत भारत और ब्रिटेन के उद्योगों तथा विश्वविद्यालयों को एक मंच पर लाकर टिकाऊ और रिसाइकिल की गई सामग्री के उपयोग से जुड़ी नई तकनीकों पर काम किया जाएगा। यह सहयोग रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के ‘ट्रांसफॉर्मिंग सिस्टम्स थ्रू पार्टनरशिप’ (टीएसपी) कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित होगा। अप्रैल 2027 से शुरू होने वाली इस पहल के तहत अधिकतम 15 रिसर्च प्रोजेक्ट्स को अनुदान दिए जाने की योजना है। प्रत्येक प्रोजेक्ट को एक लाख से डेढ़ लाख ब्रिटिश पाउंड तक की सहायता मिल सकती है और इसकी अवधि अधिकतम तीन साल होगी।


इस साझेदारी के लिए ब्रिटेन सरकार करीब 1.9 मिलियन ब्रिटिश पाउंड यानी लगभग 24.02 करोड़ रुपये का योगदान देगी, जबकि टाटा स्टील एक मिलियन ब्रिटिश पाउंड यानी करीब 12.64 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस तरह कुल प्रस्तावित निवेश लगभग 36.66 करोड़ रुपये होगा। कार्यक्रम के माध्यम से दोनों देशों के बीच तकनीकी जानकारी, अनुसंधान और औद्योगिक अनुभव साझा किए जाएंगे। साथ ही, भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के साथ पहले से जारी सहयोग को भी आगे बढ़ाया जाएगा।
टाटा स्टील के आरएंडडी, एनएमबी और ग्रैफाइन के वाइस प्रेसिडेंट सुबोध पांडेय ने कहा कि कंपनी का भविष्य सर्कुलर और सस्टेनेबल मटेरियल के क्षेत्र में नए प्रयोग करने तथा उनके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को बढ़ावा देने की क्षमता पर निर्भर करेगा। इस साझेदारी के जरिए ऐसे शोध को प्रोत्साहित किया जाएगा, जो संसाधनों के बेहतर उपयोग और टिकाऊ औद्योगिक प्रक्रियाओं को बढ़ावा दे सके।
कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रोफेसर रवि सिल्वा ने कहा कि टीएसपी का उद्देश्य ऐसे व्यावहारिक समाधान विकसित करना है, जिन्हें बड़े स्तर पर लागू किया जा सके। उनके अनुसार, यह कार्यक्रम पिछले एक दशक से अधिक समय में दुनिया भर के विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच 300 से अधिक संयुक्त परियोजनाओं को सहयोग दे चुका है। इसके माध्यम से 800 से अधिक पुरस्कार विजेताओं का नेटवर्क भी तैयार हुआ है।
नई साझेदारी में उद्योगों में इस्तेमाल किए जा सकने वाले शोध और तकनीकी समाधानों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे भारत और ब्रिटेन के शोधकर्ताओं, विश्वविद्यालयों तथा औद्योगिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ने और टिकाऊ सामग्री के क्षेत्र में नए नवाचारों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

