जमशेदपुर: करनडीह में आदिवासी सेंगेल अभियान ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर करनडीह दिशोम जाहेरथान को लेकर गंभीर आरोप लगाए। सेंगेल दिशोम परगना सोनाराम सोरेन ने दावा किया कि इस पवित्र स्थल को कुछ लोगों ने सामाजिक बहिष्कार और प्रताड़ना का रणनीति केंद्र बना दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों के इशारे पर वर्ष 2015 में आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद सालखन मुर्मू का साजिश के तहत सामाजिक बहिष्कार किया गया था।


सोनाराम सोरेन ने इस मामले में देश परगना बैजू मुर्मू, तालसा माझी बाबा सह देश पारानिक दुर्गाचरण मुर्मू और तोरोप परगना दशमत हांसदा समेत अन्य लोगों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि सालखन मुर्मू ने संताली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने और सरना धर्म कोड की मांग को लेकर संघर्ष में अहम भूमिका निभाई है। सोनाराम सोरेन ने चेतावनी दी कि यदि संबंधित अगुवाओं ने अपने आचरण में सुधार नहीं किया, तो उन्हें आदिवासी युवाओं के कड़े विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कविराज मुर्मू, विमो मुर्मू, जूनियर मुर्मू और कुनूराम बास्के समेत अन्य लोग मौजूद थे। इस दौरान जाहेरथान की सामाजिक भूमिका और समाज के भीतर लिए जाने वाले फैसलों को लेकर भी चर्चा हुई।
वहीं, धाड़ दिशोम देश पारानिक दुर्गाचरण मुर्मू ने सेंगेल अभियान के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि आरोप लगाने से पहले संबंधित लोगों को अपने आचरण पर भी विचार करना चाहिए। उनके मुताबिक, समाज का फैसला किसी एक व्यक्ति का निर्णय नहीं होता, बल्कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले कई बार विचार-विमर्श किया जाता है।

