लाइफस्टाइल: अहोई अष्टमी पर अहोई माता को भोग लगाने के लिए पारंपरिक रूप से गुड़ और गेहूं के आटे से गुलगुले बनाए जाते हैं। इन्हें मीठे पुए भी कहा जाता है। मान्यता के अनुसार, इस दिन माताएं संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। रात में तारों को देखकर व्रत खोला जाता है। पूजा के प्रसाद में गुलगुले का विशेष महत्व माना जाता है।


गुलगुले बनाने के लिए एक कप कटा या कद्दूकस किया हुआ गुड़, आधा कप पानी, एक कप गेहूं का आटा, एक चम्मच सौंफ, एक चौथाई चम्मच इलायची पाउडर, चुटकी भर बेकिंग सोडा और तलने के लिए तेल लें।
सबसे पहले पैन में पानी गर्म करके गुड़ डालें और उसे पूरी तरह घुलने दें। गुड़ का पानी छानकर थोड़ा ठंडा करें। एक बर्तन में गेहूं का आटा, सौंफ और इलायची पाउडर मिलाएं। अब धीरे-धीरे गुड़ का पानी डालते हुए गाढ़ा और चिकना बैटर तैयार करें। अंत में चुटकी भर बेकिंग सोडा मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें।
कड़ाही में मध्यम आंच पर तेल गर्म करें। चम्मच से थोड़ा-थोड़ा बैटर तेल में डालें और गुलगुलों को सुनहरा होने तक तलें। इन्हें टिश्यू पेपर पर निकाल लें, ताकि अतिरिक्त तेल निकल जाए।
गुलगुले बनाते समय गुड़ का पानी धीरे-धीरे डालें, ताकि गांठें न बनें। इन्हें मध्यम आंच पर तलना जरूरी है, जिससे वे अंदर तक पकें और बाहर से कुरकुरे बनें। गुड़ की मात्रा स्वाद के अनुसार घटाई-बढ़ाई जा सकती है।

