घाटशिला :- सोना देवी विश्वविद्यालय के विवेकानन्द ऑडिटोरियम में आज विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2025 के अवसर पर व्याख्यान का आयोजन किया गया. इसका वैश्विक विषय सेवाओं तक पहुँच आपदाओं और आपात स्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य है जो संकट के समय मानसिक स्वास्थ्य सेवा की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर प्रकाश डालता है. इस विषय के प्रमुख पहलुओं में मनोसामाजिक सहायता के लिए समन्वय तंत्र स्थापित करना, सामुदायिक प्रणालियों को मजबूत करना, मनोवैज्ञानिक प्राथमिक चिकित्सा में उत्तरदाताओं को प्रशिक्षित करना और विशेष रूप से कमजोर आबादी के लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना शामिल है. इस अवसर पर आयोजित व्याख्यान में कुलसचिव प्रो डॉ गुलाब सिंह आजाद ने कहा कि कई प्राकृतिक आपदाओं के कारण देश में हजारों लोग बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं इसलिए मानसिक स्वास्थ्य अब अनिवार्य विषय बन गया है. श्री आजाद ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य उतना ही आवश्यक है जितना शारीरिक स्वास्थ्य. डॉ गुलाब सिंह आजाद ने कहा कि वर्तमान समय में डिप्रेशन और एंजाईटी के मामले तेजी से बढ रहे हैं. विशेष रूप से युवा वर्ग में. कुलसचिव महोदय ने विषय प्रवेश कराते हुए कई तरह के मानसिक विकृतियों, उसके लक्षण तथा कारणों की चर्चा की. उन्होंने जागरूकता की कमी को मानसिक स्वास्थ्य खराब होने का प्रमुख कारण बताया. साथ ही कहा कि सही ढंग से ईलाज कराने पर मानसिक बीमारियां ठीक हो जाती है. डॉ गुलाब सिंह आजाद ने कहा कि स्टिग्मा, अज्ञानता और संसाधनों की कमी के कारण मानसिक समस्याएं बढ रही हैं. मानसिक बीमारियों का निदान और लक्षणों की पहचान कर उसका उपचार किया जाता है. उन्होंने भागवद गीता की चर्चा करते हुए कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए मन पर नियंत्रण आवश्यक है. उन्होंने एकाग्रता, प्रवृतियों, दिनचर्या और आदतों के बारे में विस्तार से बताया. साथ ही भारतीय दर्शन की चर्चा करते हुए कहा कि मन, चित्त, बुद्धि और अहंकार व्यक्तित्व के आधार हैं. कुलसचिव डॉ गुलाब सिंह आजाद ने कहा कि वर्तमान समय में संतुष्टि प्राप्त करने के लिए आत्म सुझाव और चिंतन जरूरी है. विद्यार्थी सफल होने के लिए अपने शिक्षकों के संपर्क में रहें और उनसे सलाह, मार्गदर्शन प्राप्त करें. अपनी हॉबी को बढाएं. कुलसचिव महोदय ने विद्यार्थियों को सलाह देते हुए कहा कि सफलता प्राप्त करने के लिए एक हद तक तनाव जरूरी है. उन्होंने विद्यार्थियों को आशावादी तथा आत्मनिर्भर बनने तथा दूसरों से ज्यादा अपेक्षा न रखने की सलाह दी.


सोना देवी विश्वविद्यालय के कुलपति तथा मान्यता प्राप्त नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ जे पी मिश्रा ने कहा कि सवाल यह है कि हम अपने जीवन को कैसे स्थापित करें. उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों एक दूसरे से गहरे रूप से जुड़े हुए हैं. इन्होंने मन के गत्यात्मक पहलुओं की चर्चा करते हुए कहा कि दुनिया के सभी व्यक्ति इदं, अह्म और पराअह्म से ही शासित होते हैं. डॉ जेपी मिश्रा ने व्यक्तित्व की चर्चा करते हुए कहा कि जीवन में समायोजन आवश्यक है. मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रखना है तब मनोवृति में बदलाव लाना होगा. जीवन में संतुलन जरूरी है. उन्होंने कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए स्वयं को जागरूक बनाना होगा. परिवर्तन के इस युग में परिस्थिति को ध्यान में रखकर ही आगे बढना होगा. सही सोच से ही सफलता हासिल कर सकते हैं.
इस विशेष अवसर पर सोना देवी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री प्रभाकर सिंह ने कहा कि भारतीय दर्शन, सभ्यता और संस्कृति को मानकर ही मानसिक स्वास्थ्य को कायम रखा जा सकता है. मन और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए ही विश्व भर में योग को अपनाया जा रहा है. जापान के ओकिनावा द्वीप के लोगों के स्वास्थ्य का उदाहरण देते हुए कुलाधिपति श्री प्रभाकर सिंह ने कहा कि संयमित भोजन, शारीरिक श्रम के द्वारा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है, उन्होंने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए हमें सामुदायिक जीवन को बेहतर बनाना होगा तथा पर्यावरण के साथ जुड़ना होगा. उन्होंने कल्चरल वार्निंग फ्रॉम अमेरिका टू इंडिया नाम से एक संदेश पढकर सभी को प्रेरित किया. इस मौके पर विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष, सहायक प्रोफेसर तथा विद्यार्थी उपस्थित थे.


