सिर्फ आरक्षण की उपलब्धता से किसी मेधावी SC/ST/OBC उम्मीदवार को जनरल सीट से वंचित नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

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Saraikela : सुप्रीम_कोर्ट ने हाल ही में (जनवरी 2026 में) एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि SC/#ST/OBC/ कैटेगरी के उम्मीदवारों को जनरल (ओपन/अनारक्षित) सीटों पर हक है. अगर वे मेरिट के आधार पर जनरल कैटेगरी की कट-ऑफ से ऊपर अंक प्राप्त करते हैं. यह फैसला राजस्थान हाई कोर्ट की एक भर्ती प्रक्रिया (जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट/क्लर्क पदों) से जुड़े मामले में आया है. राजस्थान हाई कोर्ट ने नियम बनाया था कि आरक्षित_कैटेगरी के उम्मीदवारों को जनरल सीट नहीं दी जाएगी, भले ही उनके अंक जनरल कट-ऑफ से ज्यादा हों. हाई कोर्ट का तर्क था कि इससे उन्हें “डबल बेनिफिट” मिलेगा (आरक्षण का लाभ + जनरल सीट)।

सुप्रीम कोर्ट (जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जी मसीह की बेंच) ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि “ओपन कैटेगरी” का मतलब ही “ओपन” है – यह सभी के लिए खुली है. किसी खास जाति या वर्ग के लिए रिजर्व नहीं. सिर्फ आरक्षण की उपलब्धता से किसी मेधावी SC/ST/OBC उम्मीदवार को जनरल सीट से वंचित नहीं किया जा सकता.

मेरिट का सम्मान सर्वोपरि है. अगर आरक्षित कैटेगरी का उम्मीदवार बिना किसी रियायत (जैसे आयु छूट आदि) के जनरल कट-ऑफ पार कर लेता है, तो उसे जनरल कैटेगरी में माना जाएगा.कोर्ट ने इंद्रा साहनी (1992) और अन्य पुराने फैसलों का हवाला देते हुए यह सिद्धांत दोहराया है.

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