बिहार की सियासत में गरजा नया तूफ़ान – सम्राट चौधरी ने लालू यादव को बताया ‘गब्बर सिंह’

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बिहार :-  बिहार की राजनीति एक बार फिर तीखे शब्दों की आग में झुलसने लगी है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘बिहार का गब्बर सिंह’ कह डाला। यह बयान आते ही सियासी गलियारों में हलचल मच गई है।

सम्राट चौधरी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “लालू यादव का दौर ऐसा था कि लोग अपने बच्चों को डराने के लिए कहते थे – सो जा बेटा, नहीं तो लालू आ जाएगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि लालू यादव का शासन जंगलराज, भ्रष्टाचार और जातिवादी राजनीति का पर्याय था।

चौधरी ने यह भी दावा किया कि लालू के समय बिहार विकास की पटरी से उतर गया था और जनता सिर्फ भय और असुरक्षा के माहौल में जीती थी। उन्होंने कहा, “बिहार के हर कोने में लालू राज का खौफ फैला रहता था। गब्बर सिंह फिल्मों में जो करता था, वो लालू जी ने ज़मीनी राजनीति में कर दिखाया।”

बीजेपी नेता के अनुसार, आज बिहार एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व को श्रेय देते हुए कहा, “अब बिहार में डर नहीं, विकास की बात होती है। आज सरकारी योजनाएं लोगों के घर तक पहुंच रही हैं।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि बीजेपी सिर्फ जाति की नहीं, जनहित की राजनीति करती है और विपक्ष को जवाब देना अच्छी तरह जानती है।

यह बयान उस वक्त आया है जब राज्य में चुनावी हलचल तेज़ हो रही है और सभी दल अपने-अपने मोर्चे पर सक्रिय हो गए हैं। बीजेपी जहां लालू यादव और उनके परिवार को निशाना बना रही है, वहीं राजद भी लगातार बीजेपी पर किसान विरोधी, गरीब विरोधी और महंगाई समर्थक होने का आरोप लगा रहा है।

राजद की ओर से अब तक इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, तेजस्वी यादव खुद इस मुद्दे पर मीडिया को संबोधित कर सकते हैं और सम्राट चौधरी को करारा जवाब दे सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान सिर्फ एक हमला नहीं, बल्कि आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा है। बीजेपी अपने पुराने नरेटिव – ‘जंगलराज बनाम सुशासन’ – को फिर से जिंदा करने की कोशिश कर रही है।

अब सवाल यह है कि जनता किसकी बातों पर भरोसा करेगी – उस नेता पर जो ‘गब्बर सिंह’ कह रहा है या उस नेता पर जिसकी राजनीति दशकों से बिहार की जमीन पर असर डालती आई है?

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