

न्यूजभारत20 डेस्क:- जस्टिस भारती डांगरे और मंजूषा देशपांडे की बेंच ने आरोपी को ऑब्जर्वेशन होम में रखे जाने के तरीके की ओर इशारा करते हुए यह बात कही। बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि पुणे पोर्श दुर्घटना का आरोपी किशोर भी सदमे में है और उसे कुछ समय दिया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे की पीठ ने पुणे पुलिस के दृष्टिकोण की ओर इशारा करते हुए यह बात कही, जिस तरह से नाबालिग को पहले जमानत दी गई और फिर बढ़ते सार्वजनिक दबाव के बीच अचानक उसे एक निरीक्षण गृह में डाल दिया गया।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने किशोर की चाची द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा, “दो लोगों की जान चली गई है। आघात था लेकिन बच्चा (किशोर) भी सदमे में था, उसे कुछ समय दें।” पॉर्श पुणे दुर्घटना में आरोपी। किशोर की चाची ने उसे पर्यवेक्षण गृह से रिहा करने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।