हाफ-एनकाउंटर’ पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, गैर-जरूरी फायरिंग को बताया कानून का उल्लंघन

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जमशेदपुर। पुलिस द्वारा की जा रही कथित ‘हाफ-एनकाउंटर’ कार्रवाई को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के सख्त रुख का असर झारखंड समेत पूरे देश में देखने को मिल रहा है। अदालत ने दो-टूक शब्दों में स्पष्ट किया है कि किसी भी आरोपी को सज़ा देना न्यायपालिका का अधिकार क्षेत्र है, न कि पुलिस का। गैर-ज़रूरी फायरिंग न केवल अस्वीकार्य है बल्कि यह सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है।

यह अहम आदेश जस्टिस अरुण कुमार देशवाल की पीठ ने पारित किया है। कोर्ट ने कहा कि प्रमोशन, बहादुरी दिखाने या सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से गोली चलाना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। किसी आरोपी को जानबूझकर शरीर के किसी हिस्से पर गोली मारना भी पूरी तरह अस्वीकार्य है। एनकाउंटर के दौरान यदि आरोपी को गंभीर चोट पहुंचती है तो अब सख्त कानूनी प्रक्रिया और नियमों का पालन अनिवार्य होगा।

हाईकोर्ट ने पुलिस के लिए छह बिंदुओं वाली गाइडलाइंस जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट के चर्चित PUCL बनाम राज्य मामले में तय दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि इन निर्देशों की अनदेखी होने पर संबंधित जिले के SP और SSP को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई भी की जा सकती है।

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए जमशेदपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने इसे कानून के राज को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक निर्णय बताया। उन्होंने कहा, “पुलिस का काम कानून के दायरे में रहकर जांच और गिरफ्तारी करना है, न कि सज़ा देना। हाईकोर्ट का यह फैसला मानवाधिकारों की रक्षा के साथ-साथ पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही तय करेगा।”

अधिवक्ता पप्पू ने आगे कहा कि यदि इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए तो फर्जी मुठभेड़ों पर प्रभावी रोक लगेगी और आम जनता का भरोसा न्याय व्यवस्था पर और अधिक मजबूत होगा।

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