करनडीह दिशोम जाहेरथान में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संताली में नेहोर गीत गाया, संताली साहित्यकारों को किया सम्मानित

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Saraikela  : करनडीह स्थित दिशोम जाहेरथान प्रांगण में आयोजित ऑल इंडिया संताली राइटर्स एसोसिएशन और दिशोम जाहेरथान कमेटी के 22वें संताली परसी माहा एवं ओलचिकी शताब्दी समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संताली में अपना संबोधन दिया. यहां उन्होंने कहा कि यहां आने से पहले जाहेर आयो को जोहार कर रघुनाथ मुर्मू को श्रद्धांजलि दी. राष्ट्रपति ने कहा कि हम सब जानते हैं कि संथाल में जन्म लेकर कई जगह पहुंचे है. इसमें हमारे इष्टदेव का आशीष है. उन्होंने कहा कि बचपन में मैंने नेहर गीत सीखा था. अपने संबोधन के दौरान उन्होंने संताली में नेहोर गीत गाकर अपने संबोधन की शुरुआत की. राष्ट्रपति ने ओलचिकी के शताब्दी समारोह में कहा कि ओलचिकी को जन जन तक पहुंचाने के लिए दीवार पर संताली लिपि में कलाकृतियाँ बनायें. उन्होंने कहा कि ओलचिकी के विस्तार और उत्थान में मेरा भी छोटा सा योगदान रहा है. उन्होंने कहा कि अपने बच्चों को अपनी मातृभाषा अवश्य सिखायें. एकजुट होकर इसे और समृद्ध बनाने में योगदान दें. उन्होंने कहा कि सिर्फ संताली ही नहीं हो, मुंडा, समेत सभी का उत्थान करना है. इसके लिए जो आगे रहेगा उन्हें पीछे रह गए भाषा को साथ खींच कर आगे ले आना है. राष्ट्रपति ने कहा कि देश के 75 पीवीटी ट्राइबल (पर्टिक्यूलरली वुलरेनेबल ट्राइबल ग्रुप) अभी भी पेड़ में रहते हैं. उनके घर नहीं हैं. उनके कपड़े नहीं हैं और हम लोग अमृतपाल वर्ष माना रहे हैं. आख़िरकार सरकार ने बात सुनी और बिरहोर समेत सभी आदिवासी के लिए 24 हज़ार करोड़ से उनके विकास को काम करने का मिशन शुरू किया. कहा कि ये आदिवासी नहीं जानते कि पीएम आवास बन रहे है. ये लोग यह भी नहीं जानते कि सीमेंट कहाँ से आएगा, घर कैसे बनेगा इसलिए उन्हें घर बनाकर देना होगा. राष्ट्रपति ने कहा मेरे लोग (आदिवासी) अभी भी बच्चे हैं. इन्हें पैसे का इस्तेमाल करना नहीं आता. इसलिए उन्हें पैसे नहीं दें. इन्हें घर बनाकर दें. राष्ट्रपति ने कहा लेकिन हमें भी सीखना होगा.

उन्होंने कहा बताया कि शिक्षा कितना ज़रूरी है, लेकिन इससे हम हमारे गांव घर से अलग हो गए, लेकिन समय निकाल कर हमें अपने गांव अपने भाई बहनों का हाल चाल लेना है. आज हमारे अपने लोग बड़े बड़े ऑफिसर हैं, हमें अपने पीछे रह गए लोगों को कौशल सीखना है हमें कम से कम दो लोगों को विकसि करना है. हमें क्षमता के हिसाब से गांव को गोद लेना है. ताकि जो पीछे रह गए उन्हें अपने साथ लेकर चले और खड़े कर सकें. उन्होंने महिलाओं को आगे मौका दिए जाने पर सराहना की. उन्होंने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने पर वे अपना रास्ता खोज लेंगे. राष्ट्रपति ने संताली राइटर्स के योगदान पर कहा कि आदिवासियों के स्वाभिमान और अस्तित्व रक्षा के लिए इनका योगदान अभूतपूर्व है. कहा कि यह हर साल यह संगठन ओलचिकी उत्थान को कम करती है. अपने दैनिक जीवन से समय निकाल कर ये भाई बहन ओलचिकी के लिए काम कर रहे है. उन्होंने कहा कि रघुनाथ मुर्मू के काम को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने संविधान के संताली अनुवाद पर कहा कि अटल बिहारी बाजपेयी के 100 साल पर ओलचिकी में संविधान का प्रकाशन किया गया. यह कार्य भी संताली समाज को सशक्त करने की दिशा में एक कदम है.

* साहित्यकारों को मिला सम्मान- 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संताली साहित्यकारों और ओलचिकी को समृद्ध बनाने वालों को सम्मानित किया गया इसमें शोभनाथ बेसरा (गुरु गोमके के साथ काम कर चुके), पद्मश्री डॉ दमयंती बेसरा, मुचीराम हेम्ब्रॉम, भीमवार मुर्मू ( रघुनाथ मुर्मू के पोते), साखी मुर्मू (शिक्षक), रामदास मुर्मू (संताली लाइब्रेरियन), चुंडा सोरेन सिपाही (लेखक), छोतराय बास्के (ओलचिकी शिक्षक), निरंजन हंसदा (साहित्यकार), बीबी सुंदरमन एवं सौरव (टीएसएफ), शिव शंकर कंडेयांग ( ओलचिकी सेंटर चलाने वाले), सीआर माझी (रघुनाथ मुर्मू एकेडमी के सेंटर संचालक), को सम्मानित किया गया.

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