. “कोल्हान टाइगर की दहाड़ क्यों हो रही कमजोर? चंपाई सोरेन का समर्थन बन रहा हार की वजह!”

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आदित्यपुर/सरायकेला:- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री सह सरायकेला विधानसभा के विधायक चंपाई सोरेन के लिए इन दिनों राजनीतिक समीकरण कुछ ठीक नहीं दिख रहे हैं। हाल के चुनावी नतीजों पर नजर डालें तो जिन उम्मीदवारों का उन्होंने समर्थन किया, उन्हें लगातार हार का सामना करना पड़ा है।

कोल्हान टाइगर के नाम से जाने जाने वाले चंपाई सोरेन की राजनीति में पकड़ हमेशा से मजबूत मानी जाती रही है, लेकिन बीते दिनों में उनकी इस पकड़ पर मानो किसी की नजर लग गई हो। हालिया घटनाक्रम और चुनावी नतीजे इशारा कर रहे हैं कि उनका राजनीतिक प्रभाव अब पहले जैसा असरदार नहीं रह गया है। शायद यही वजह है कि जिन समीकरणों पर वे भरोसा कर रहे हैं, वही अब उनके पक्ष में परिणाम नहीं दे पा रहे हैं।

सबसे पहले घाटशिला विधानसभा क्षेत्र से उनके पुत्र बाबूलाल सोरेन को करारी हार झेलनी पड़ी। इसके बाद निकाय चुनाव में भी चंपाई सोरेन ने आदित्यपुर नगर निगम के मेयर और सरायकेला नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए अपने समर्थित उम्मीदवार मैदान में उतारे, लेकिन दोनों को हार का सामना करना पड़ा।

इसके बावजूद चंपाई सोरेन नहीं रुके और आदित्यपुर नगर निगम के डिप्टी मेयर के अप्रत्यक्ष चुनाव में अर्चना सिंह को अपना समर्थन दिया। हालांकि इस चुनाव में भी उन्हें सफलता नहीं मिली और अर्चना सिंह को हार का सामना करना पड़ा।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान भारतीय जनता पार्टी संगठन के भीतर से भी चंपाई सोरेन पर पार्टी लाइन से हटकर काम करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर लगातार हार के पीछे कारण क्या है।

अर्चना की हार के बाद चुनाव प्रक्रिया पर सवाल

डिप्टी मेयर चुनाव में अर्चना सिंह की हार की घोषणा चार बार रिकाउंटिंग के बाद की गई। इसके बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन सरायकेला डीसी कार्यालय पहुंचे और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए धांधली का आरोप लगाया।

हालांकि प्रशासन ने उनके आरोप को खारिज कर दिया। एडीसी के अनुसार यह मतदान पूरी तरह गुप्त था, ऐसे में किस पार्षद ने किसे वोट दिया, इसका पता लगाना संभव नहीं है। ऐसे में परिणाम घोषित होने के बाद प्रशासन पर आरोप लगाना कई लोगों की समझ से परे है।

क्या है मतदान की प्रक्रिया

अप्रत्यक्ष चुनाव से पहले सभी पार्षदों को मतदान की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी जाती है। मतदान शुरू होने से पहले बैलेट बॉक्स को वीडियो रिकॉर्डिंग के बीच पलटकर दिखाया जाता है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उसमें पहले से कोई मत नहीं है। इसके बाद गुप्त मतदान कराया जाता है और फिर मतगणना की प्रक्रिया भी वीडियो रिकॉर्डिंग के बीच पूरी की जाती है। अंत में सभी पार्षदों से अनापत्ति ली जाती है और उसके बाद ही विजेता की घोषणा की जाती है।

एक समय था जब चंपाई सोरेन के झारखंड मुक्ति मोर्चा में रहते हुए एक भी डिसीजन बिना उनके सहमति के नहीं होता था। चाहे पार्टी लाइन से जुड़ा निर्णय हो या फिर झारखंड के राजनीति में उलटफेर करना हो या फिर प्रशासनिक फेरबदल का मामला हो। क्योंकि झारखंड के कुल लगभग 14 सीट पर चंपाई सोरेन का एकाधिकार समझा जाता था।

लेकिन चंपई सोरेन के भारतीय जनता पार्टी में आते ही जेएमएम आलाकमान को ये स्पष्ट हो गया कि कोल्हान चंपाई सोरेन के भरोसे नहीं है बल्कि आज भी तीर कमान की स्थिति मजबूत है। बीते 2024 के चुनाव में भाजपा के रहते हुए कोल्हान के 3 सीट पर चंपाई सोरेन ने उम्मीदवारों का समर्थन किया था जिसमें एक स्वयं थे। ताजुब की बात यह रही कि इस चुनाव में भी चंपाई सोरेन सिर्फ अपनी सीट बचा सके, बाकी दोनों सीट पर हार का सामना करना पड़ा।