अनुकृत्ति संस्था की पहल पर 06 माह की बच्ची का ईलाज शुरू हुआ

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जमशेदपुर : ये मामला बारीडीह, बिरसानगर के रहने वाले अशोक रविदास के परिवार की है. जो एक बंधुवा मज़दूर है, और उनकी पत्नी गीता रविदास, जो कि एक गिरहणी है, इन दोनों की 6 माह की बच्ची का मल दुवार नही होने के कारण, बच्ची को काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था, जब घर मे बेटी के आने की ख़ुशी में, पूरा परिवार खुशहाल था, पर वो खुशी ग़म में तब्दील तब हुई, जब जन्म के एक माह के उपरांत, उस बच्ची के माँ-बाप को पता चला की उनकी बच्ची का शरीर सही तरीके से विकसित नहीं हुआ है उस बच्ची का मल दुवार नही है, ये बात की जानकारी जब उसके मकान मालकिन को बताई तो उनकी मकान मालकिन ने इस बात को छुपाने को कहाँ,

इसी तरह इस बात को 3 माह तक सभी से छुपा कर रखा, जब बच्ची को हद से ज़्यादा परशानी होने लगी और वो रोने लगी तो उसके पिता ने आनन-फानन में इलाज के बारीडीह के मर्सी हस्पताल में लेकर गया, जँहा डॉक्टर ने एक स्टील की पतली सिकनी (रॉड) दे दिया और बच्ची के मल दुवार को हल्का सा खोल दिया और कुछ दवा दे छोड़ दिया. 20 से 25 दिंन तक अशोक रविदास के परिवार ने  ऐसा ही किया, जब बच्ची और रोने लगी तो साकची स्तिथ (प्राइवेट) अभिषेक हॉस्पिटल ले जाया गया. जँहा पर औपरेशन के लिए 2 लाख रूपए का बड़ा पैकेज बताया गया. जो की अशोक रविदास के बस के बाहर था. वो हताश हो कर घर में बैठ गया. अपनी बच्ची को रोता हुआ देखता रहा. इसी तरह 2 माह बीत गए. ये बात अनुकृत्ति संस्था के अध्यक्ष बबलु राज को पता चली तो वो तुरंत उस बस्ती में पहुच गए. जहाँ बच्ची को रोते हुए देखा पूछने पर बच्ची की माँ गीता रविदास ने रोते हुए सारी बात बताई. तब बबलु राज ने तत्काल उस बच्ची को जमशेदपुर के एम्.जी.एम्   हस्पताल गयें. जँहा पर पता चला की हॉस्पिटल में वो मशीने नही है जिस से इस बच्ची का ऑपरेशन हो सके. तब संस्था के अध्य्क्ष बबलु राज और उनकी टीम ने स्वास्थ्य मंत्री से इस बात की गुहार लगाई तब जाकर बच्ची को रांची के रिम्स हॉस्पिटल में रेफ़र कर दिया गया. जँहा रिम्स के डॉक्टरों ने बहुत जल्द ऑपरेशन करने का आश्वासन दिया. बच्ची के पिता के पास पैसे न होने के कारण, अनुकृत्ति संस्था की और से कुछ सहयोग राशि की मदद भी की और आगे भी मदद का वादा किया है.

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