

न्यूजभार20 डेस्क:- बिहार में अप्रैल 2016 से लागू शराबबंदी कानून के बावजूद राज्य में जहरीली शराब का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 9 वर्षों में 190 लोगों की मौत की पुष्टि राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की गई है। यह आंकड़ा सरकार की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे कहीं ज्यादा भयावह मानी जा रही है। राज्य सरकार के मुताबिक, सारण, सीवान, गया, भोजपुर, बक्सर और गोपालगंज जैसे जिलों में जहरीली शराब पीने से सबसे ज्यादा लोगों की मौत हुई है। ये जिले शराब के अवैध कारोबार और निर्माण के लिए पहले से बदनाम रहे हैं, और यहां से बार-बार जहरीली शराबकांड की खबरें सामने आती रही हैं।

हालांकि, सरकारी रिपोर्ट में 190 मौतों की पुष्टि की गई है, लेकिन स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि पिछले 9 सालों में सैकड़ों लोग जहरीली शराब की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं। कई बार प्रशासन इन मौतों को प्राकृतिक कारण या बीमारी बताकर रिकॉर्ड में शामिल नहीं करता, जिससे वास्तविक आंकड़े छुप जाते हैं। बिहार में शराबबंदी को लागू करने का मकसद सामाजिक सुधार और अपराध नियंत्रण था, लेकिन इसके लागू होने के बाद अवैध शराब का धंधा और भी गोपनीय और खतरनाक बन गया है। जहरीली शराब के कारण बार-बार जानें जाना इस बात का संकेत है कि शराबबंदी के बाद अवैध शराब कारोबार ने जड़ें और गहरी कर ली हैं।
इस विषय पर राजनीतिक दलों की ओर से सरकार को कठघरे में खड़ा किया जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि शराबबंदी कानून को लागू करने में प्रशासन पूरी तरह विफल रहा है। वहीं, सरकार का कहना है कि वह लगातार छापेमारी और निगरानी अभियान चला रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। स्थानीय नागरिकों और पीड़ित परिवारों में इस मुद्दे को लेकर भारी नाराजगी है। वे सरकार से मांग कर रहे हैं कि शराबबंदी की आड़ में पनप रहे अवैध कारोबार पर सख्त कार्रवाई हो और जहरीली शराब से हो रही मौतों की निष्पक्ष जांच की जाए। बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद जहरीली शराब से हो रही मौतें इस बात का संकेत हैं कि नीति और उसके क्रियान्वयन के बीच गहरी खाई मौजूद है। सरकार को अब कड़े फैसले लेने होंगे ताकि एक सामाजिक सुधार की कोशिश जानलेवा न बन जाए।