जामताड़ा: जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत 4 लाख 83 हजार रुपये की कथित फर्जी निकासीका मामला सामने आया है। संबंधित लाभुक ने इस मामले की शिकायत उपायुक्त (डीसी) से करते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के बाद प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की संभावना बढ़ गई है।


लाभुक का आरोप है कि मनरेगा योजना के तहत उसके नाम पर स्वीकृत राशि में से ₹4.83 लाख की निकासी उसकी जानकारी और सहमति के बिना कर ली गई। उसने दावा किया कि न तो उसे उक्त राशि प्राप्त हुई और न ही उसने किसी को पैसे निकालने की अनुमति दी। मामले की जानकारी मिलने के बाद लाभुक ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।
पीड़ित ने उपायुक्त को दिए आवेदन में पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। साथ ही संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया है। लाभुक ने यह भी मांग की है कि कथित रूप से निकाली गई राशि की भरपाई सुनिश्चित की जाए।
इस घटना के सामने आने के बाद मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन और भुगतान प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सरकारी योजनाओं के लाभुकों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन होगा। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को दंडित करने की मांग की है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले की जांच की जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल लाभुक को निष्पक्ष जांच और न्याय का आश्वासन दिया गया है।
यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना में वित्तीय अनियमितताओं और निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है।

