RIMS रांची: 10 साल पुराने मामले में डॉ. अनुज शर्मा के पक्ष में हाईकोर्ट का फैसला, लेक्चरर नियुक्ति का रास्ता साफ

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रांची: RIMS के डेंटल इंस्टीट्यूट में लेक्चरर की नियुक्ति से जुड़े करीब 10 साल पुराने मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने डॉ. अनुज शर्मा के पक्ष में फैसला सुनाया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने RIMS द्वारा उनकी उम्मीदवारी खारिज करने के आदेश को गलत और मनमाना बताते हुए रद्द कर दिया। कोर्ट ने डॉ. शर्मा को पीरियोडोंटोलॉजी एंड ओरल इंप्लांटोलॉजी विभाग में लेक्चरर नियुक्त करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने डॉ. संतोष कुमार वर्मा की करीब 10 साल पुरानी नियुक्ति को रद्द नहीं किया है। उन्हें वर्तमान पद पर काम करते रहने की अनुमति दी गई है। दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए RIMS को डॉ. अनुज शर्मा के लिए नया लेक्चरर पद और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित प्रमोशनल पद सृजित करने का निर्देश दिया गया है।

कोर्ट ने RIMS को आदेश की प्रति प्राप्त होने के आठ सप्ताह के भीतर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। डॉ. शर्मा की नियुक्ति डॉ. वर्मा की नियुक्ति की तारीख से प्रभावी मानी जाएगी। उन्हें वरिष्ठता, वेतनमान में संशोधन और परिणामी पदोन्नति संबंधी लाभ मिलेंगे, हालांकि पिछले वर्षों का वेतन बकाया नहीं मिलेगा।

मामला RIMS के 7 नवंबर 2015 के विज्ञापन से जुड़ा है। डॉ. अनुज शर्मा ने लेक्चरर पद के लिए आवेदन किया था और 1 अप्रैल 2016 को साक्षात्कार में शामिल हुए थे। बाद में डॉ. संतोष कुमार वर्मा का चयन हुआ। इसके बाद डॉ. शर्मा ने अपनी उम्मीदवारी खारिज किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था। अब अदालत के फैसले के बाद RIMS में उनकी नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।