रांची में डॉक्टरों का काला बिल्ला लगाकर विरोध, मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट समेत कई मांगें उठाईं; 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार का समर्थन

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रांची: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और झारखंड स्वास्थ्य सेवा संघ (झासा) के संयुक्त आंदोलन के तहत मंगलवार को रिम्स के प्रशासनिक भवन में चिकित्सकों ने काला बिल्ला लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। इसमें वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ बड़ी संख्या में जूनियर डॉक्टर भी शामिल हुए। चिकित्सकों ने मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने, डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (डीएसीपी) का लाभ देने, स्वीकृत रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति और महिला चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। प्रदर्शन में शामिल चिकित्सकों ने 22 अक्टूबर से प्रस्तावित कार्य बहिष्कार का भी समर्थन किया।

चिकित्सकों ने समयबद्ध पदोन्नति, नैदानिक प्रतिष्ठान अधिनियम में व्यावहारिक संशोधन, सिंगल विंडो लाइसेंसिंग और आयुष्मान भारत से जुड़ी लंबित समस्याओं के समाधान की मांग उठाई। इसके साथ ही सरकार और चिकित्सा संगठनों के बीच संयुक्त निगरानी तंत्र बनाने पर भी जोर दिया गया।

पूर्व जेडीए अध्यक्ष जयदीप चौधरी ने मेडिकल कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में फैकल्टी और बुनियादी सुविधाओं की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने दुमका मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में पानी की आपूर्ति बाधित होने और पलामू मेडिकल कॉलेज में बिजली की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि बेहतर चिकित्सा शिक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन जरूरी हैं। उन्होंने रिम्स में भी हॉस्टल, मेस, आधारभूत संरचना और जूनियर डॉक्टरों को समय पर स्टाइपेंड मिलने जैसी समस्याओं के समाधान की जरूरत बताई।

पूर्व जेडीए अध्यक्ष डॉ. विकास ने कहा कि चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। इलाज के दौरान डॉक्टरों के साथ मारपीट की घटनाओं को रोकना चिकित्सकों और मरीजों, दोनों के हित में है। झारखंड आईएमए अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने मेडिकल कॉलेजों में प्रशिक्षित कर्मियों, पैरामेडिकल स्टाफ, आधुनिक उपकरणों, शोध और शैक्षणिक सुविधाओं को मजबूत करने की मांग की। उन्होंने सुरक्षित कार्यस्थल और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।