रांची: झारखंड की 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के चालक और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। लंबित वेतन भुगतान, सेवा से हटाए गए कर्मचारियों की वापसी और नौकरी की सुरक्षा की मांग पर कर्मियों ने गुरुवार रात आठ बजे से 40 घंटे की सांकेतिक कार्यबंदी शुरू की है। यह कार्यबंदी शनिवार, 17 अक्टूबर की सुबह आठ बजे तक जारी रहने की घोषणा की गई है।


शुक्रवार को बड़ी संख्या में एंबुलेंस कर्मी रांची के नामकुम स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कार्यालय के सामने जुटे और धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का कहना है कि जुलाई 2026 से उनका मानदेय बकाया है। लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ ने कर्मचारियों की सेवा अवधि 60 वर्ष की आयु तक निर्धारित करने की मांग भी उठाई है। संघ का कहना है कि नई सेवा प्रदाता एजेंसी के आने की स्थिति में मौजूदा कर्मचारियों का रोजगार प्रभावित नहीं होना चाहिए। इसके लिए सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने और हटाए गए कर्मियों को वापस लेने की मांग की गई है।
संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, 16 सितंबर को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में समस्याओं के समाधान के लिए 15 से 20 दिनों का समय दिया गया था। हालांकि, संघ का आरोप है कि निर्धारित समय बीतने के बावजूद मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द निर्णय नहीं लेती है, तो 21 अक्टूबर से पूरे राज्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। ऐसे में आंदोलन लंबा खिंचने पर आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

