आदित्यपुर में एआई एथिक्स कार्यशाला आयोजित, विद्यार्थियों ने सीखा चैटजीपीटी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का जिम्मेदार उपयोग

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आदित्यपुर स्थित श्रीनाथ कॉलेज ऑफ एजुकेशन एवं श्रीनाथ पब्लिक स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को विद्यार्थियों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और उसके नैतिक उपयोग पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की रिसोर्स पर्सन डॉ. दीपशिखा बेहरा रहीं, जो एडिनबर्ग विश्वविद्यालय में इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस्ड स्टडीज इन द ह्यूमैनिटीज में पोस्ट डॉक्टोरल फेलो तथा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के ऑक्सफोर्ड कॉम्परेटिव क्रिटिसिज्म एंड ट्रांसलेशन रिसर्च सेंटर में परियोजना सहयोगी के रूप में कार्यरत हैं।

कार्यशाला का विषय “ट्रांसलेटिंग मल्टीलिंगुअल वर्ल्ड्स यूजिंग एलएलएम्स: एथिक्स ऑफ एआई ट्रांसलेशन इन स्कूल एजुकेशन इन द ग्लोबल साउथ” था। डॉ. दीपशिखा ने विद्यार्थियों से एआई की समझ और उसके प्रभावों पर चर्चा करते हुए कहा कि एआई मानव द्वारा विकसित तकनीक है, लेकिन यह मानव की सोच और संवेदनाओं का विकल्प नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों से एआई के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों पर विचार साझा करने को कहा।

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को रचनात्मक गतिविधियों में शामिल किया गया। अधूरी कविताओं और कहानियों को अपनी कल्पना से पूरा करने के माध्यम से सृजनात्मक सोच को प्रोत्साहित किया गया। साथ ही विद्यार्थियों को एक हिंदी कविता का अपनी-अपनी मातृभाषा में अनुवाद करने का अभ्यास कराया गया। इस अवसर पर डॉ. दीपशिखा ने बताया कि भारत जैसी बहुभाषी परिस्थितियों में एआई आधारित अनुवाद हमेशा पूरी तरह सटीक नहीं होते।

श्रीनाथ कॉलेज ऑफ एजुकेशन की प्राचार्या डॉ. मौसुमी महतो तथा श्रीनाथ पब्लिक स्कूल के प्राचार्य संजय कुमार सिंह ने कहा कि एआई के इस दौर में विद्यार्थियों के लिए तकनीक के सही और जिम्मेदार उपयोग की जानकारी अत्यंत आवश्यक है। कार्यशाला में दोनों संस्थानों के शिक्षक एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।