झारखंड: महुआडांड़ प्रखंड के पकरीपाठ गांव में इन दिनों पेयजल संकट गंभीर रूप ले चुका है। गांव में स्थापित 5 जलमीनारों में से 4 पूरी तरह खराब पड़े हैं, जबकि एकमात्र चालू जलमीनार भी पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहा है। इसके पीछे कम बोरिंग (जलस्तर) मुख्य कारण बताया जा रहा है, जिससे पानी बहुत धीमी गति से निकलता है।


गांव में लगभग 40 घरों की आबादी है, जो इस एकमात्र जलमीनार पर निर्भर हैं। ऐसे में सभी परिवारों के लिए पानी की आपूर्ति करना बेहद मुश्किल हो गया है। सुबह से ही ग्रामीण पानी भरने के लिए कतार में लग जाते हैं और कई बार उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है।एक ग्रामीण ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा, “पानी के लिए दिनभर इंतजार करना पड़ता है। कई बार हमारी बारी ही नहीं आ पाती, जिससे पीने के पानी तक की समस्या हो जाती है।”गांव की महिलाएं और बच्चे इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। उन्हें घरेलू कामकाज छोड़कर पानी भरने के लिए लंबा समय देना पड़ रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ स्थिति और भी खराब होती जा रही है, जिससे लोगों में चिंता बढ़ गई है।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जलमीनारों की मरम्मत को लेकर कई बार संबंधित विभाग को सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। इससे प्रशासन और विभागीय लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं।
*ग्रामीणों की मांग:*
खराब पड़े 4 जलमीनारों की जल्द मरम्मत कराई जाए,चालू जलमीनार की बोरिंग गहराई बढ़ाई जाए,वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था तत्काल उपलब्ध कराई जाए ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि इस गंभीर समस्या को जल्द से जल्द दूर किया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके और उन्हें बुनियादी जरूरत पानी के लिए संघर्ष न करना पड़े।

