

न्यूजभारत20 डेस्क:- अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सरकार द्वारा घोषित टैरिफ उपायों के बावजूद बाजार लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। मंगलवार को प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों में लगभग 6% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के बीच घबराहट और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। हाल ही में अमेरिका ने कुछ देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर नए टैरिफ (शुल्क) लगाने की घोषणा की थी, जिससे घरेलू उद्योगों को समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी। इस ऐलान के पीछे उद्देश्य यह था कि देश की अर्थव्यवस्था को संतुलन में लाया जा सके और ट्रेड घाटे को कम किया जा सके।

हालाँकि, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इन टैरिफ्स का असर तत्काल नहीं दिखेगा और इससे वैश्विक व्यापार संबंधों में तनाव और अधिक बढ़ सकता है। इसी अनिश्चितता के चलते निवेशकों ने बड़े पैमाने पर शेयर बेचने शुरू कर दिए, जिसके चलते बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को डर है कि टैरिफ नीति से महंगाई बढ़ सकती है और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में तेजी आ सकती है। इसके साथ ही, अन्य देश भी जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं, जिससे ट्रेड वॉर की स्थिति बन सकती है। इस गिरावट के चलते अब दबाव फेडरल रिजर्व (अमेरिकी केंद्रीय बैंक) पर भी बढ़ता दिख रहा है।
उम्मीद की जा रही है कि फेड अगली बैठक में ब्याज दरों में कटौती या अन्य नीतिगत उपायों की घोषणा कर सकता है ताकि बाजार को स्थिर किया जा सके। अमेरिका की इस गिरावट का असर वैश्विक शेयर बाजारों पर भी पड़ा है। एशियाई और यूरोपीय बाजारों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। भारत, जापान, जर्मनी और यूके के बाजारों में भी निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। बाजार के जानकारों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशकों की नजर अब फेडरल रिजर्व की अगली नीति बैठक, अमेरिका-चीन व्यापार संबंधों, और सरकार द्वारा संभावित प्रोत्साहन पैकेज पर टिकी है।