

न्यूजभारत20 डेस्क/न्यू दिल्ली:- कोरोना महामारी के दौरान भारत की वैक्सीन कूटनीति ने देश की सॉफ्ट पावर को वैश्विक स्तर पर मजबूत किया है। “वैक्सीन मैत्री” (Vaccine Maitri) पहल के तहत भारत ने 100 से अधिक देशों को कोविड-19 टीके भेजे, जिससे उसकी छवि एक जिम्मेदार और विश्वसनीय साझेदार के रूप में उभरी। इस पहल ने न केवल वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को बल दिया, बल्कि भारत की कूटनीतिक ताकत को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। 2021 में शुरू हुई इस पहल के तहत भारत ने निम्न और मध्यम आय वाले देशों को मुफ्त या रियायती दरों पर टीके उपलब्ध कराए। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक द्वारा निर्मित कोविशील्ड और कोवैक्सिन जैसी वैक्सीन दुनिया भर में सराही गईं।

वैश्विक प्रभाव और कूटनीतिक लाभ
1. अंतरराष्ट्रीय संबंध मजबूत हुए – भारत ने नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, भूटान, मालदीव, अफ्रीका और लैटिन अमेरिकी देशों को टीके देकर उनके साथ कूटनीतिक संबंधों को और सशक्त किया।
2. मेड इन इंडिया की साख बढ़ी – वैक्सीन मैत्री से भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग को वैश्विक पहचान मिली और “मेड इन इंडिया” ब्रांड को मजबूती मिली।
3. चीन के प्रभाव का संतुलन – भारत की पहल ने दक्षिण एशिया और अफ्रीका में चीन की वैक्सीन कूटनीति को चुनौती दी।
4. WHO और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की सराहना – विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भारत की इस पहल की सराहना की।
अंतरराष्ट्रीय नेताओं की प्रतिक्रिया
भारतीय वैक्सीन की खेप प्राप्त करने वाले देशों के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का आभार जताया। ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो ने भारत की तुलना संजीवनी देने वाले हनुमान से की थी, जबकि नेपाल और श्रीलंका ने इसे एक “टाइमली हेल्प” करार दिया। भारत की वैक्सीन कूटनीति ने देश की सॉफ्ट पावर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। इस पहल ने भारत को वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाया और “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना को साकार किया। कोविड-19 के कठिन समय में भारत की यह पहल दुनिया भर में सहयोग और परोपकार का प्रतीक बन गई।