वाराणसी :बिजली विभाग में करोड़ों रुपये के गबन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए लेखाकार केशवेंद्र द्विवेदी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। जांच में सामने आया कि उसने विद्युतीकरण कार्य के लिए कार्यदायी संस्था को भेजी जाने वाली करीब सात करोड़ रुपये की रकम अपने और परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी थी। मामले का खुलासा होने के बाद उसे पहले निलंबित किया गया, फिर गिरफ्तार किया गया। अब तक गबन की गई राशि में से 3 करोड़ 13 लाख 91 हजार रुपये की वसूली हो चुकी है, जबकि 3 करोड़ 76 लाख 65 हजार रुपये की रिकवरी की प्रक्रिया जारी है।


जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई। मामले के अनुसार, राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत 27 मार्च 2004 को मेसर्स एनसीसी लिमिटेड (हैदराबाद) को 6 करोड़ 90 लाख 57 हजार रुपये का भुगतान होना था, लेकिन रकम फर्जी तरीके से लेखाकार और उसके परिजनों के खातों में पहुंचा दी गई। बैंक को संदेह होने पर विभाग को सूचना दी गई, वहीं संबंधित संस्था ने भी भुगतान न मिलने की शिकायत की थी। इसके बाद जांच में पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ और चितईपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया।
पूछताछ के दौरान आरोपी फरार हो गया था, लेकिन करीब तीन महीने बाद उसने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। जांच में यह भी सामने आया कि उसने गबन की रकम पत्नी और अन्य रिश्तेदारों के खातों में भेजी थी। आरोप है कि इसी धन से उसने वाराणसी और प्रयागराज में कई संपत्तियां खरीदीं, फ्लैट लिए और लग्जरी जीवनशैली अपनाई.

