

न्यूजभारत20 डेस्क:- अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। चीन ने अमेरिका द्वारा लगाए गए आयात शुल्कों के जवाब में अमेरिकी उत्पादों पर 34% का भारी टैक्स लगा दिया है। यह फैसला चीन की तरफ से की गई जवाबी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच चल रहा ट्रेड वॉर और अधिक तीखा हो गया है। हाल ही में अमेरिका ने चीन से आयातित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, स्टील और अन्य औद्योगिक उत्पादों पर उच्च शुल्क लगाने की घोषणा की थी। इसके जवाब में चीन ने भी तत्काल प्रभाव से कई प्रमुख अमेरिकी उत्पादों — जिनमें कृषि उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल पार्ट्स और टेक्सटाइल शामिल हैं — पर 34% का जवाबी आयात शुल्क लगाने का फैसला किया है।

चीन के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, जिन अमेरिकी उत्पादों पर यह टैक्स प्रभावी होगा, उनमें शामिल हैं:
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सोयाबीन, कॉर्न, गेहूं जैसी कृषि उपज
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मांस और डेयरी उत्पाद
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ऑटोमोबाइल और उनके पुर्जे
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स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान
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फैब्रिक और कपड़ा उत्पाद
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस टैक्स से द्विपक्षीय व्यापार और वैश्विक बाजारों पर बड़ा असर पड़ेगा। चीन और अमेरिका दोनों ही दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं, और इनके बीच व्यापारिक अस्थिरता से एशियाई व यूरोपीय बाजारों में भी गिरावट देखी जा सकती है। बीजिंग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ली झाओ ने कहा, “यह कदम अमेरिका को सीधी चुनौती है। चीन अब दबाव में झुकने के बजाय मुकाबले की मुद्रा में आ चुका है।” व्हाइट हाउस की ओर से इस पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने चीन के फैसले को “अनुचित और असंतुलित” बताया है और संकेत दिए हैं कि अमेरिका और कड़े प्रतिबंध लगाने पर विचार कर सकता है।
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डॉव जोन्स और NASDAQ में शुरुआती गिरावट देखी गई
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शंघाई स्टॉक एक्सचेंज में भी हल्की गिरावट
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कच्चे तेल और सोने की कीमतों में हलचल
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अंतरराष्ट्रीय निवेशकों में बढ़ी अनिश्चितता
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि दोनों देशों ने बातचीत का रास्ता नहीं अपनाया तो यह ट्रेड वॉर आगे चलकर वैश्विक मंदी जैसी स्थितियों को जन्म दे सकता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व व्यापार संगठन (WTO) ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है।