राजस्थान बोर्ड परीक्षा में असफल छात्रों को राहत, पढ़ाई जारी रखने की मिलेगी सुविधा

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न्यूजभारत20 डेस्क:- राजस्थान सरकार ने विद्यार्थियों के हित में एक बड़ा और सराहनीय फैसला लिया है। अब राज्य में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में असफल होने वाले छात्रों की पढ़ाई नहीं रुकेगी। शिक्षा विभाग की इस नई योजना के तहत असफल छात्र भी आगे की कक्षाओं में दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे। राज्य सरकार के निर्देशों पर शिक्षा विभाग ने यह पहल शुरू की है, जिसके तहत बोर्ड परीक्षा में फेल होने वाले छात्रों को मानसिक तनाव से बाहर निकालने और ड्रॉपआउट दर को कम करने का लक्ष्य रखा गया है। नई व्यवस्था के अनुसार, असफल छात्र विशेष ब्रिज कोर्स या सपोर्टिव क्लासेज के साथ अगली कक्षा में प्रवेश ले सकेंगे, और साथ ही वे अपनी पिछली परीक्षा की तैयारी भी दोबारा कर पाएंगे।

राजस्थान के शिक्षा मंत्री बी.डी. कल्ला ने इस निर्णय की जानकारी देते हुए कहा, “हमारे युवा छात्रों को सिर्फ एक परीक्षा में असफल होने पर शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। यह नीति उन्हें दूसरा मौका देने के लिए है ताकि वे शिक्षा की मुख्यधारा में बने रहें।” इस योजना को पहले कुछ जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा, जिसके परिणामों के आधार पर पूरे राज्य में विस्तार किया जाएगा। स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे छात्रों को मानसिक सहयोग और अकादमिक गाइडेंस भी प्रदान करें। शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे परीक्षा में असफल होने के कारण होने वाली निराशा, डिप्रेशन और आत्महत्या जैसे मामलों में कमी आएगी। छात्रों को दूसरा मौका मिलने से आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे भविष्य के लिए बेहतर तैयारी कर सकेंगे।

क्या रहेगा ढांचा?

  • असफल छात्र “स्पेशल री-एडमिशन स्कीम” के तहत आगे की कक्षा में प्रवेश पा सकेंगे

  • उन्हें नियमित कक्षाओं के साथ ब्रिज कोर्स और काउंसलिंग दी जाएगी

  • अगली बोर्ड परीक्षा में शामिल होकर वे पिछली कक्षा की परीक्षा फिर से दे सकेंगे

  • स्कूलों को विशेष गाइडलाइंस भेजी जाएंगी ताकि हर छात्र को बराबरी का मौका मिले

राजस्थान सरकार की यह पहल एक सकारात्मक और दूरदर्शी कदम है जो शिक्षा को हतोत्साहित करने के बजाय, छात्रों को प्रोत्साहन देने की दिशा में काम करेगी। यह निर्णय न केवल ड्रॉपआउट दर को कम करेगा, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में समावेशिता और मानवता की भावना को भी मजबूती देगा।

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