चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक होता है आयोजन

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न्यूजभारत20 डेस्क:- चैत्र नवरात्र के दौरान मनाई जाने वाली छठ पूजा का विशेष महत्व है। यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होकर सप्तमी तिथि तक चलता है। इस वर्ष यह 1 अप्रैल 2025 से शुरू हो रहा है। यह व्रत विशेष रूप से उत्तर भारत, विशेषकर बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। चैत्र छठ मुख्य रूप से सूर्य देव और छठी मइया की आराधना के लिए किया जाता है। व्रती (उपासक) कठिन नियमों का पालन करते हुए चार दिनों तक उपवास रखते हैं। इस दौरान नदियों, तालाबों या घर के आंगन में बनाए गए जलकुंड में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि इस पूजा से सुख-समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है।

1. नहाय-खाय (चतुर्थी तिथि): व्रती इस दिन शुद्धता और पवित्रता के साथ स्नान कर सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।

2. लोहंडा और खरना (पंचमी तिथि): इस दिन उपवास रखा जाता है और शाम को गुड़ और चावल से बनी खीर का भोग लगाया जाता है।

3. संध्या अर्घ्य (षष्ठी तिथि): व्रती डूबते सूर्य को जल अर्पित कर संतान और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

4. उषा अर्घ्य (सप्तमी तिथि): अंतिम दिन सूर्योदय के समय अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है।

चैत्र नवरात्र में आने वाली यह छठ पूजा कार्तिक माह में होने वाली छठ पूजा की ही तरह महत्वपूर्ण होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से न केवल स्वास्थ्य लाभ मिलता है बल्कि परिवार में सुख-समृद्धि भी आती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी सूर्य को अर्घ्य देने से ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक शांति मिलती है।

इस वर्ष भी श्रद्धालु पूरे भक्ति भाव के साथ इस पर्व को मना रहे हैं और छठी मइया से अपने परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं।

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