जमशेदपुर :- टाटानगर रेलवे स्टेशन पर इन दिनों कीमती ताजे पानी की बर्बादी यात्रियों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। स्टेशन परिसर में लगे रिफिलिंग पाइपों से लगातार बहते हुए पानी की तस्वीरें और वीडियो सामने आ रही हैं, जिससे यह साफ है कि अमूल्य संसाधनों की सुरक्षा को लेकर रेलवे प्रशासन लापरवाह है।


जहां एक ओर देशभर में जल संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसी घटनाएं न केवल सरकारी प्रयासों को ठेस पहुंचा रही हैं, बल्कि आम लोगों के बीच भी गलत संदेश भेज रही हैं। गौरतलब है कि टाटानगर स्टेशन झारखंड का एक प्रमुख रेलवे जंक्शन है, जहां प्रतिदिन हजारों यात्री आते-जाते हैं। ऐसे में पानी की व्यवस्था और उसके रख-रखाव को लेकर रेलवे की जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पृथ्वी पर उपलब्ध कुल जल का मात्र 0.007% हिस्सा ही ऐसा है जो पीने योग्य है और वह भी लगातार घट रहा है। ऐसे में इस प्रकार का जल अपव्यय आने वाले समय में गहरी समस्या को जन्म दे सकता है।
स्थानीय यात्रियों और सामाजिक संगठनों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि अविलंब इस पानी की बर्बादी को रोका जाए और पाइपलाइन की मरम्मत कर जिम्मेदार कर्मियों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही स्टेशन पर जल संरक्षण से जुड़ी सूचनाएं और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, ताकि लोग भी सतर्क हों और जागरूकता बढ़े।


