जमशेदपुर- प्रकृति विहार, कदमा में 14 से 20 अगस्त तक लगने वाले जोहार हाट में झारखंड सहित असम और ओडिशा के आदिवासी जीवन, संस्कृति और शिल्पकला की झलक देखने को मिल रही है। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य आदिवासी परंपराओं को संरक्षित करना और स्थानीय कारीगरों को मंच प्रदान करना है।


जोहार हाट में मड़वा मोमोज जैसे पारंपरिक व्यंजन, ओडिशा के साबई घास के उत्पाद, असम के बोडो जनजाति के हस्तशिल्प, झारखंड के टेराकोटा, डोकरा आर्ट, बेंत शिल्प और ट्राइबल ज्वेलरी के साथ-साथ पारंपरिक पेंटिंग जैसे सांगी और सोहराय कला भी प्रदर्शित की जा रही है। इसके अलावा आदिवासी उपचार पद्धति पर आधारित ‘नेशनल ट्राइबल ट्रेडिशनल हीलर्स’ कार्यक्रम भी आयोजन का हिस्सा है।
कार्यक्रम में बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू और पोटो हो जैसे आदिवासी नायकों के योगदान को विशेष रूप से याद किया जा रहा है। साथ ही, बच्चों और युवाओं के लिए हस्तकला कार्यशालाएं, पेंटिंग वर्कशॉप और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी।
आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन न केवल आदिवासी कला और संस्कृति को प्रोत्साहन देगा, बल्कि कारीगरों को अपनी कला को व्यापक बाजार तक पहुंचाने का अवसर भी प्रदान करेगा।


