पूर्वोत्तर के युवाओं के लिए नया अध्याय, असम को मिला पहला आईआईएम…

Spread the love

नई दिल्ली / गुवाहाटी :- संसद ने असम में नए भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) की स्थापना से जुड़े विधेयक को पारित कर दिया है। इस फैसले को पूर्वोत्तर भारत के लिए शिक्षा और विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर, विशेषकर असम के युवाओं के लिए यह एक नए युग की शुरुआत है। शाह ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि संसद में असम में आईआईएम की स्थापना का बिल पारित होना क्षेत्र की जनता के लिए नए सवेरे जैसा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि पूर्वोत्तर को शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योगों का मजबूत केंद्र बनाया जाए, जहां के लोगों को पढ़ाई या इलाज के लिए देश के दूसरे हिस्सों में पलायन न करना पड़े बल्कि दूसरे राज्यों के लोग यहां आकर लाभ उठाएं। शाह ने इसे पूर्वोत्तर को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में निर्णायक कदम बताया।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी इस ऐतिहासिक निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि असम को गुवाहाटी में अपना पहला आईआईएम मिलने जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करेगा और पूर्वोत्तर के युवाओं को विश्वस्तरीय प्रबंधन शिक्षा तथा अनुसंधान का अवसर प्रदान करेगा। प्रधान ने लिखा कि यह कदम प्रधानमंत्री मोदी के व्यापक विकास दृष्टिकोण का हिस्सा है और असम को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक होगा। उन्होंने इस अवसर पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और असम की जनता को बधाई दी।

विशेषज्ञों का मानना है कि आईआईएम गुवाहाटी की स्थापना से न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र को शिक्षा और शोध का नया केंद्र मिलने वाला है। इससे यहां के युवाओं को प्रबंधन शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों में पलायन नहीं करना पड़ेगा। गौरतलब है कि केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से पूर्वोत्तर में बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, पर्यटन और शिक्षा के क्षेत्र में बड़े कदम उठा रही है। अब आईआईएम गुवाहाटी की शुरुआत यह साबित करती है कि सरकार पूर्वोत्तर को भारत की विकास यात्रा में एक सक्रिय और प्रभावशाली भागीदार बनाना चाहती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *