रामकथा के दूसरे दिन ऋषि दुर्वासा प्रसंग पर चर्चा, मां लक्ष्मी की माला इंद्र से राजा दक्ष तक पहुंचने की कथा सुनाई : मंदाकिनी मां

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Saraikela : रामकथा के दूसरे दिन वाराणसी से पधारी मां मंदाकिनी ने ऋषि दुर्वासा प्रसंग पर चर्चा की. उन्होंने मां लक्ष्मी द्वारा मिली हार को पहले इंद्र और फिर राजा दक्ष तक पहुंचा. जिस माला को राजा दक्ष ने शयनकक्ष में रखा, जिसके दोष की वजह से 87 हजार वर्ष तक मैया सती को कठोर तपस्या करनी पड़ी. यह मार्मिक प्रसंग को कहते हुए मंदाकिनी मां ने श्रद्धालुओं से कहा कि यज्ञ आदि में मिले माला को शयनकक्ष में नहीं रखना चाहिए इससे पाप लगता है. इसके बाद मां मंदाकिनी ने सती और शिव विवाह प्रसंग की बातें सुनाई. उन्होंने बताया कि बिन बुलाए कहाँ कहाँ नहीं जाना चाहिए. जिसमें उन्होंने गुरु, भगवान, मित्र और पिता के घर जाना चाहिए लेकिन जहां आपका विरोध हो रहा हो वहां नहीं जाना चाहिए. पिता के घर यदि कोई आयोजन हो और आपको निमंत्रण नहीं मिला हो तो भी नहीं जाना चाहिए. बता दें कि  हरिओम नगर स्थित कलश रूपी शिव काली मंदिर में 15 जनवरी से रामकथा का आयोजन हो रहा है जिसमें धर्मानुरागी भक्तों की भारी भीड़ लग रही है. बता दें कि इस मंदिर में मंदिर के 15वें स्थापना दिवस पर हर वर्ष 11 दिवसीय रामकथा सह शत चंडी महायज्ञ का आयोजन होता है. इस वर्ष पहली बार यहां महिला कथा वाचक को आमंत्रित किया गया है. कथा सुनने वालों में सैंकड़ों महिला और पुरुष शामिल रहे. यहां आगामी 23 जनवरी तक रामकथा और धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन होगा. इस आयोजन में समाजसेवी एके श्रीवास्तव, आरएन प्रसाद, वीरेंद्र कुमार यादव, केडी सिंह, रविन्द्र नाथ चौबे, हरेन्द्र तिवारी, प्रकाश मेहता, जवाहर लाल सिंह उर्फ मामा जी, रजनीकांत जायसवाल और सूरज भदानी, समिति के अध्यक्ष उपेन्द्र ठाकुर, महामंत्री मनोज तिवारी तथा कैलाश पाठक, एस० वेणुगोपाल, जतन कुमार, प्रमोद सिंह, मनोज आगीवाल, नीतू शर्मा, उमेश कुमार दुबे, अनिल प्रसाद, मीना सिंह, संध्या प्रधान, सत्यम भारद्वाज, मंदिर के पुजारी चंद्रभान पंडित आदि अहम योगदान कर रहे हैं.

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