धनबाद:- कोयला तस्करी के संगठित नेटवर्क को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अब जांच को निर्णायक मोड़ पर पहुंचा दिया है। एजेंसी ने वर्ष 2015 से धनबाद में पदस्थापित रहे डीसी , डीएसपी और एसपी स्तर के अधिकारियों की संपत्ति की जांच शुरू कर दी है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी ने राज्य सरकार के कार्मिक विभाग और पुलिस मुख्यालय को पत्र भेजकर धनबाद में तैनात रहे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का पूरा सेवा-रिकॉर्ड, आय का विवरण और चल-अचल संपत्तियों की जानकारी मांगी है। जांच एजेंसी को संदेह है कि कोयला तस्करी का यह खेल बिना प्रभावशाली संरक्षण के संभव नहीं था।
ईडी की जांच में उन अधिकारियों पर खास नजर है जो वर्षों तक धनबाद जैसे संवेदनशील जिले में जमे रहे। एजेंसी यह पड़ताल कर रही है कि इस दौरान उनकी संपत्ति में असामान्य वृद्धि तो नहीं हुई और क्या उनकी आय ज्ञात स्रोतों से मेल खाती है।
21 नवंबर को कोयला कारोबारियों के ठिकानों पर हुई छापेमारी ने जांच को नई दिशा दी। ईडी के हाथ ऐसे डिजिटल साक्ष्य लगे हैं, जिनसे रोजाना बड़े पैमाने पर हो रही कोयला तस्करी के संकेत मिले हैं। इन सबूतों के आधार पर अब जांच सीधे पुलिस और प्रशासनिक संरक्षण के घेरे तक पहुंच चुकी है।
जांच एजेंसी को शक है कि तस्करी का सिंडिकेट केवल कारोबारियों तक सीमित नहीं था, बल्कि उसे सिस्टम के भीतर से भी ताकत मिल रही थी। यही वजह है कि 2015 से अब तक धनबाद में पदस्थ रहे तमाम वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जांच के दायरे में लाया गया है। धनबाद में रह चुके थाना प्रभारीयों की लिस्ट और उनके संपत्ति को लेकर भी ईडी ने जानकारी मांगी है।
ईडी सूत्रों का कहना है कि यह जांच अभी शुरुआती चरण में है और आगे कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। यदि संपत्ति और आय में विसंगतियां पाई जाती हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा सकता। give me the same headline

