आदित्यपुर नगर निगम की राजनीति एक बार फिर विवादों और चर्चाओं के केंद्र में आ गई है। नए मेयर संजय सरदार के कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही शहर में कथित “वसूली तंत्र” और दबाव की राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।


राजनीतिक गलियारों में इन घटनाक्रमों की तुलना पूर्व मेयर राधा सांडिल के कार्यकाल से की जा रही है। वर्ष 2013 से 2018 के दौरान नगर निगम में कथित प्रभाव और विवादों को लेकर कई तरह की बातें सामने आती रही थीं, जिनकी गूंज अब फिर सुनाई देने लगी है।
ताजा चर्चाओं में एक बिल्डर से जुड़े मामले को लेकर नगर निगम द्वारा नोटिस जारी किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक दलों और सोशल मीडिया पर इसे लेकर प्रतिक्रियाएं तेज हैं।
इसके साथ ही हाल ही में वायरल हुए एक भोजपुरी रील विवाद ने भी मेयर की छवि पर असर डाला है, जिसे लेकर जनता के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया देखी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगर निगम के पूर्व कार्यकाल, जैसे विनोद श्रीवास्तव और रीता श्रीवास्तव के समय अपेक्षाकृत संतुलित प्रशासन देखने को मिला था। ऐसे में अब शहर में यह बहस तेज हो गई है कि क्या आदित्यपुर फिर से पुराने विवादों की ओर बढ़ रहा है।
फिलहाल, आदित्यपुर में राजनीतिक माहौल गरम है और नगर निगम की कार्यशैली को लेकर लोगों के बीच सवाल लगातार उठ रहे हैं।

