आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में पानी और साफ-सफाई जैसी बुनियादी समस्याओं को लेकर हालात गंभीर होते जा रहे हैं। इन मुद्दों को लेकर अब सियासी घमासान भी तेज हो गया है। नगर निगम के मेयर संजय सरदार की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, जबकि 28 मई को प्रस्तावित बोर्ड बैठक को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है।


स्थानीय सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित बोर्ड बैठक का मुख्य एजेंडा आदित्यपुर-2 स्थित जागृति भवन में नगर निगम के प्रशासनिक कार्यालय के संचालन को लेकर है। हालांकि, क्षेत्र की जनता पेयजल संकट, गंदगी, खराब स्ट्रीट लाइट और टूटी सड़कों जैसी समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे में केवल प्रशासनिक भवन के मुद्दे पर बैठक बुलाना जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाने के रूप में देखा जा रहा है।
इधर, इन समस्याओं को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झारखंड मुक्ति मोर्चा) और भारतीय जनता पार्टी के बीच तकरार बढ़ती दिख रही है। विपक्ष के नेता भुगलू सोरेन उर्फ डब्बा सोरेन ने नगर निगम प्रशासन और मेयर पर जनहित की अनदेखी का आरोप लगाया है। उनके नेतृत्व में 22 मई को नगर निगम कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन की घोषणा की गई है।
प्रदर्शन के दौरान पानी की किल्लत, बिजली व्यवस्था, जर्जर सड़कें, जाम नालियां, खराब साफ-सफाई व्यवस्था और बढ़ती महंगाई जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी है। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर विकास कार्यों को बाधित करने का आरोप लगाया है।
दूसरी ओर, नगर निगम के कई पार्षद भी मौजूदा कार्यशैली से नाराज बताए जा रहे हैं। उनका कहना है कि कई वार्डों में पानी की भारी कमी है, कचरा उठाव नियमित नहीं हो रहा, नालियां जाम हैं और स्ट्रीट लाइट महीनों से खराब पड़ी हैं। इसके बावजूद इन मुद्दों पर गंभीर पहल नहीं की जा रही है।
पार्षदों ने यह भी आरोप लगाया है कि पिछली बोर्ड बैठकों में पारित प्रस्तावों की प्रतिलिपि अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है, और आगामी बैठक के लिए भी पार्षदों से एजेंडा नहीं मांगा गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 28 मई को होने वाली बोर्ड बैठक में जनहित से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जाती है या फिर यह बैठक केवल प्रशासनिक भवन के मुद्दे तक सीमित रह जाती है।

