महुआडांड़ में डीजल-पेट्रोल संकट से खेती पर संकट, सूखने लगी फसलें

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ग्रामीण इलाकों में गहराता पेट्रोल-डीजल संकट अब गंभीर कृषि संकट का रूप लेता जा रहा है। खासकर खरीफ फसलों के इस अहम समय में सिंचाई के लिए डीजल पर निर्भर किसान पूरी तरह असहाय नजर आ रहे हैं। मोटर पंप बंद पड़े हैं, खेतों में नमी खत्म होती जा रही है और फसलें सूखने लगी हैं। इससे किसानों की महीनों की मेहनत और लागत पर पानी फिरने का खतरा मंडरा रहा है।

लगातार कई दिनों से पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त ईंधन की आपूर्ति नहीं होने के कारण किसानों को घंटों इंतजार के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है, जिससे उनमें भारी नाराजगी है। छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जिनके पास सिंचाई के वैकल्पिक साधन नहीं हैं।

यदि समय रहते प्रशासन द्वारा ईंधन की आपूर्ति सुचारु नहीं की गई, तो इसका असर न केवल फसल उत्पादन पर पड़ेगा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित होगी। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि कृषि कार्यों को प्राथमिकता देते हुए डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि फसलों को बचाया जा सके और बड़े नुकसान से राहत मिल सके।