उत्तराखंड : Uttarakhand की पवित्र उर्गम घाटी में स्थित Kalpeshwar Mahadev Temple सनातन आस्था का एक अनोखा और दिव्य केंद्र है। पंच केदारों में पांचवें और अंतिम धाम के रूप में प्रसिद्ध यह मंदिर अपनी विशिष्टता के लिए जाना जाता है, जहां भगवान शिव की जटाओं (केश) की पूजा की जाती है।


यह पंच केदार का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसके कपाट पूरे वर्ष श्रद्धालुओं के लिए खुले रहते हैं, जिससे हर मौसम में भक्त यहां आकर दर्शन कर सकते हैं। प्राकृतिक गुफा में स्थित यह मंदिर अपनी रहस्यमयी संरचना और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।
Pushkar Singh Dhami ने भी इस धाम की आध्यात्मिक और प्राकृतिक महिमा को साझा करते हुए कहा कि यह स्थान श्रद्धालुओं को गहरी शांति और सुकून प्रदान करता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसका भव्य वीडियो साझा कर लोगों को यहां आने के लिए प्रेरित किया।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, Mahabharata युद्ध के बाद पांडव भगवान शिव का आशीर्वाद और क्षमा प्राप्त करने के लिए यहां पहुंचे थे। वहीं, Durvasa ऋषि ने भी इसी क्षेत्र में कल्पवृक्ष के नीचे कठोर तपस्या की थी, जिसके कारण इस धाम का नाम “कल्पेश्वर” पड़ा।
मंदिर के समीप बहने वाली कल्पगंगा नदी, चारों ओर फैले हरे-भरे जंगल, ऊंचे पहाड़ और सेब के बगीचे इस स्थान को आध्यात्मिकता के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम बनाते हैं।
यदि आप Chamoli की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इस पावन धाम के दर्शन अवश्य करें—जहां प्रकृति और परमात्मा का दिव्य मिलन हर श्रद्धालु को एक अलग ही अनुभूति कराता है।

