जमशेदपुर/गालूडीह: गालूडीह स्थित नेशनल हाईवे पर मां वैष्णो देवी मंदिर के समीप एक ऐसे शिवभक्त से मुलाकात हुई, जिसकी आस्था, संकल्प और हिम्मत ने हर किसी को भावुक कर दिया। नवगछिया, भागलपुर (बिहार) निवासी मुकेश कुमार कांवर में पवित्र जल लेकर सुल्तानगंज से पैदल यात्रा करते हुए पुरी धाम की ओर बढ़ रहे हैं।


भीषण गर्मी, तपती सड़क, धूल भरा रास्ता और नंगे पांव चलने की पीड़ा के बावजूद उनके चेहरे पर थकान से ज्यादा भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट श्रद्धा साफ झलकती है।
मुकेश कुमार ने बताया कि उन्होंने सुल्तानगंज से जल भरकर अपनी कठिन पदयात्रा की शुरुआत की थी और बिहार से निकलकर विभिन्न रास्तों से होते हुए अब गालूडीह पहुंचे हैं। उनका अगला पड़ाव घाटशिला है, जहां विश्राम करने के बाद वे आगे पुरी धाम के लिए रवाना होंगे।
आर्थिक रूप से साधारण परिवार से आने वाले मुकेश खेती और मजदूरी कर जीवनयापन करते हैं, लेकिन भगवान शिव के प्रति उनकी आस्था इतनी प्रबल है कि आर्थिक कठिनाइयां भी उनके संकल्प को डिगा नहीं सकीं।
उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है—तेज धूप में शरीर झुलसता है, पैरों में छाले पड़ जाते हैं, भूख-प्यास सताती है—लेकिन जैसे ही “भोले बाबा” का नाम लेते हैं, उन्हें नई ऊर्जा मिलती है और उनके कदम आगे बढ़ने लगते हैं।
मुकेश के अनुसार, यह यात्रा सिर्फ पैदल चलना नहीं, बल्कि तपस्या और आत्मविश्वास की एक कठिन परीक्षा है। सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करना, सड़क किनारे तेज रफ्तार वाहनों के बीच कांवर और जल को संभालते हुए आगे बढ़ना बेहद जोखिम भरा होता है। कई बार रात में सुरक्षित ठिकाना नहीं मिलता और भोजन-पानी की भी परेशानी झेलनी पड़ती है।
इसके बावजूद, उनकी भक्ति में कोई कमी नहीं आती। गालूडीह में जब राहगीरों ने उन्हें नंगे पांव तपती सड़क पर चलते देखा, तो कई लोग रुककर उनकी आस्था और हिम्मत को नमन करते नजर आए।
आज के दौर में, जहां लोग छोटी-छोटी परेशानियों से घबरा जाते हैं, वहीं मुकेश कुमार जैसे शिवभक्त सनातन संस्कृति, त्याग और सच्ची श्रद्धा की जीवंत मिसाल बनकर सामने आते हैं। उनका यह सफर समाज को यह संदेश देता है कि सच्ची आस्था इंसान को हर कठिन रास्ता पार करने की ताकत देती है।

