रांची: झारखंड हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ ने अधिवक्ता अच्युत स्वरूप मिश्रा से जुड़े मामले को गंभीर बताते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संघ का आरोप है कि हजारीबाग के कोर्रा थाना में शिकायत दिए जाने के बावजूद उनकी प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा रही है, जबकि उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिलने का दावा किया गया है।


इसी मुद्दे को लेकर अधिवक्ता संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने डीजीपी से मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई तथा अधिवक्ता और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई।
संघ ने कहा कि अधिवक्ता अच्युत स्वरूप मिश्रा लंबे समय से जनहित से जुड़े मामलों को न्यायालय में उठाते रहे हैं। वर्ष 2021 में उन्होंने हजारीबाग शहर की यातायात व्यवस्था और आम लोगों की सुरक्षा से संबंधित एक जनहित याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां भी की थीं।
अधिवक्ता संघ का आरोप है कि जनहित के मुद्दे उठाने के बाद से उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं, लेकिन शिकायत के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। संघ ने डीजीपी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

