मुंबई: टाटा समूह के भीतर टाटा संस की भविष्य की रणनीति और शेयर बाजार में सूचीबद्धता को लेकर मतभेद सामने आए हैं। टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस के निदेशक मंडल को दो अलग-अलग पत्र लिखकर कारोबार पुनर्गठन योजना पर चर्चा और मतदान कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने शापूरजी पालोनजी (एसपी) समूह की ओर से टाटा संस में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचकर करीब 25,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना पर भी विस्तृत जानकारी मांगी है।


सूत्रों के मुताबिक, दोनों पत्र टाटा संस के सचिव सुप्रकाश मुखोपाध्याय को भेजे गए हैं। कंपनी के नियमों के तहत कोई भी निदेशक 15 दिन का नोटिस देकर बोर्ड बैठक के एजेंडे में किसी विषय को शामिल करने का अनुरोध कर सकता है। टाटा संस की अगली बोर्ड बैठक 26 नवंबर को प्रस्तावित है।
पहले पत्र में नोएल टाटा ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड में विलय करने के प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान की मांग की है। इस पुनर्गठन से टाटा संस एक परिचालन कंपनी बन सकती है और एनबीएफसी-सीआईसी की श्रेणी से बाहर आने का रास्ता खुल सकता है। इससे आरबीआई के सूचीबद्धता संबंधी निर्देशों पर भी असर पड़ सकता है। नोएल ने 11 सितंबर को आरबीआई की ओर से भेजे गए पत्र पर चर्चा की मांग भी की है। आरबीआई ने टाटा संस का पंजीकरण रद्द करने का आवेदन खारिज करते हुए कंपनी की लिस्टिंग अनिवार्य बताई थी।
दूसरे पत्र में उन्होंने एसपी समूह की हिस्सेदारी बेचने की योजना के मूल्यांकन का आधार और प्रक्रिया बताने को कहा है। इससे पहले 17 सितंबर की बोर्ड बैठक में आरबीआई के निर्देशों का पालन करने के पक्ष में फैसला हुआ था, जहां नोएल टाटा के रुख को बहुमत का समर्थन नहीं मिला था। इस बीच, टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच मुलाकात भी हुई थी। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर टाटा संस और नोएल टाटा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

