सरायकेला-आदित्यपुर। आदित्यपुर की दिन्दली बस्ती में वर्षों पुराने तालाब को कथित रूप से भरकर बनाए गए श्रीनाथ यूनिवर्सिटी के भवनों को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठे हैं। आरटीआई कार्यकर्ता सह वरिष्ठ नागरिक प्रो. एसके महतो ने संबंधित अधिकारियों को रिमाइंडर भेजकर मामले की उच्चस्तरीय जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।


शिकायतकर्ता का दावा है कि मामले से जुड़े दस्तावेज, साक्ष्य और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला पहले भी अधिकारियों को दिया जा चुका है, लेकिन वर्षों बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। रिमाइंडर में आदित्यपुर नगर निगम, नगर विकास एवं आवास विभाग, सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त, कोल्हान प्रमंडल के आयुक्त और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग समेत कई प्राधिकारों को पत्र भेजने की बात कही गई है।
शिकायत में CNT Act, 1908 की धारा 46 और सुप्रीम कोर्ट के Hinch Lal Tiwary बनाम Kamala Devi & Others फैसले का हवाला देते हुए जमीन की प्रकृति और उपयोग की जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने भवन निर्माण की अनुमति, नक्शा, जमीन के उपयोग, NOC और विश्वविद्यालय संचालन से संबंधित अनुमतियों की भी जांच की मांग की है।
उन्होंने भवनों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाते हुए मिट्टी धंसने, जलभराव या अन्य संभावित जोखिम की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। साथ ही जमीन की खरीद-बिक्री और विश्वविद्यालय की स्थापना से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है। अब देखना है कि प्रशासन इस पुराने मामले में जांच और कार्रवाई को लेकर क्या कदम उठाता है।

