झारखंड राज्यसभा चुनाव में बैजनाथ राम और परिमल नथवानी विजयी, कांग्रेस को बड़ा झटका

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रांची/झारखंड: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव का परिणाम राजनीतिक समीकरणों से कहीं अधिक रोचक साबित हुआ। मतदान और मतगणना के बाद Baijnath Ram और Parimal Nathwani विजयी घोषित हुए, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार Pranav Jha को हार का सामना करना पड़ा। इस परिणाम ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों और संभावित बदलावों की चर्चा को तेज कर दिया है।

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बैजनाथ राम को राज्यसभा भेजकर दलित समाज को मजबूत राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री Hemant Soren की यह रणनीति आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। लातेहार क्षेत्र और अनुसूचित जाति समाज में बैजनाथ राम की मजबूत पकड़ को देखते हुए उनकी जीत को झामुमो के सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

वहीं एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी ने जीत दर्ज कर चौथी बार संसद पहुंचने का रिकॉर्ड बनाया है। वर्ष 2008 में पहली बार झारखंड से राज्यसभा पहुंचे नथवानी 2014 में भाजपा और आजसू के समर्थन से निर्विरोध चुने गए थे। इसके बाद 2020 में वे आंध्र प्रदेश से राज्यसभा पहुंचे और अब 2026 में एक बार फिर झारखंड से जीत दर्ज की है।

इस चुनाव में कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका लगा है। पर्याप्त संख्या बल होने के दावे के बावजूद पार्टी अपने उम्मीदवार को जीत नहीं दिला सकी। परिणाम के बाद महागठबंधन में क्रॉस वोटिंग की चर्चाएं तेज हो गई हैं। चुनाव से पहले कांग्रेस ने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति बनाई थी, लेकिन इसके बावजूद सफलता नहीं मिल सकी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव का यह परिणाम आगामी विधानसभा चुनावों पर भी प्रभाव डाल सकता है। जहां झामुमो दलित वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश करेगा, वहीं भाजपा और एनडीए इस जीत को अपने पक्ष में राजनीतिक माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। कांग्रेस के लिए यह परिणाम संगठन और गठबंधन रणनीति पर पुनर्विचार का संकेत माना जा रहा है।