Education News: चंडीगढ़ विश्वविद्यालय में कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन प्राइवेट यूनिवर्सिटीज (CIPU) द्वारा आयोजित दो दिवसीय तृतीय भारत हायर एजुकेशन समिट का सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में देशभर के 200 से अधिक निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, शिक्षाविदों और प्रतिनिधियों ने भाग लेकर उच्च शिक्षा के भविष्य और “विकसित भारत 2047” के विजन पर व्यापक चर्चा की।


सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में लोकसभा सांसद अनुराग ठाकुर उपस्थित रहे। उनके साथ पूर्व केंद्रीय शिक्षा सचिव भास्कर चटर्जी (आईएएस), चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रविराज सीतारमण, एमआईटी-डब्ल्यूपीयू पुणे के एक्जीक्यूटिव प्रेसिडेंट एवं सीआईपीयू के संस्थापक राहुल कराड तथा सीआईपीयू के अध्यक्ष एवं सरला बिरला विश्वविद्यालय के महानिदेशक प्रो. गोपाल पाठक सहित कई शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं ने सहभागिता की।
सम्मेलन के दौरान शिक्षा, नवाचार, कौशल विकास, अनुसंधान और मानव पूंजी निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक विकास के प्रमुख आधार भी हैं।
अपने संबोधन में अनुराग ठाकुर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती भूमिका, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लाभ तथा विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में पारंपरिक शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और मजबूत नैतिक मूल्यों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
सीआईपीयू के संस्थापक राहुल कराड ने नवाचार और तकनीकी प्रगति को भविष्य की शिक्षा का आधार बताते हुए छात्रों को नए विचारों और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
प्रो. गोपाल पाठक ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल देते हुए कहा कि छात्रों को पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक चुनौतियों के प्रति जागरूक बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों से समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
सम्मेलन के सफल आयोजन पर सरला बिरला विश्वविद्यालय के प्रतिकुलाधिपति बिजय कुमार दलान, कुलपति प्रो. सी. जगन्नाथन तथा राज्यसभा सांसद एवं निदेशक (प्लानिंग एंड डेवलपमेंट) डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने आयोजकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
यह सम्मेलन उच्च शिक्षा क्षेत्र में सहयोग, नवाचार और राष्ट्रीय विकास के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

