सरकारी अस्पतालों में दवाओं की निर्बाध उपलब्धता के लिए झारखंड सरकार ने ₹67.37 करोड़ का बजट किया निर्धारित

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रांची: झारखंड सरकार ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में आवश्यक और जीवनरक्षक दवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 67 करोड़ 37 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया है। स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों को आवश्यक दवाओं का पर्याप्त भंडार बनाए रखने का निर्देश दिया है, ताकि मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

स्वास्थ्य विभाग ने विशेष रूप से सर्पदंश (सांप के काटने) और कुत्ते के काटने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए अस्पतालों में एंटी-स्नेक वेनम (ASV) और एंटी-रेबीज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। ग्रामीण और वन क्षेत्रों में स्थित स्वास्थ्य केंद्रों एवं अस्पतालों को इन दवाओं का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि इन इलाकों में ऐसे मामलों की संभावना अधिक रहती है।

विभाग ने आगामी मानसून सीजन को ध्यान में रखते हुए मलेरिया, डेंगू और डायरिया जैसी मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए आवश्यक दवाओं की खरीद प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि समय रहते पर्याप्त तैयारी होने से मौसमी बीमारियों के प्रभाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा, दवा खरीद एजेंसियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि खरीदी जाने वाली दवाओं की कम से कम 80 प्रतिशत शेल्फ लाइफ शेष हो, ताकि अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण और उपयोग योग्य दवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। अस्पतालों को निर्धारित सूची के अनुसार आवश्यक दवाओं की खरीद करनी होगी।

दवाओं की उपलब्धता और भंडारण व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित सिविल सर्जनों को सौंपी गई है। उन्हें नियमित रूप से दवाओं के स्टॉक की समीक्षा कर किसी भी प्रकार की कमी होने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना और मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है। विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।