पांकी थाना हिरासत मौत मामले में हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, न्यायिक जांच के निर्देश

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पलामू न्यूज: पलामू जिले के पांकी थाना में हिरासत के दौरान युवक महफूज अहमद की मौत और उसे हिरासत के लिए “फिट” घोषित किए जाने के मामले में Jharkhand High Court ने बड़ा आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि हिरासत में हुई मौत और उससे जुड़े सभी तथ्यों का खुलासा हो सके।

न्यायमूर्ति Sujit Narayan Prasad और न्यायमूर्ति Anubha Rawat Choudhary की खंडपीठ ने लातेहार और पलामू के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को मजिस्ट्रेट की निगरानी में मामले की जांच कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने अपने आदेश में पूरे घटनाक्रम में संभावित लापरवाही और बाद में मामले को दबाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

यह मामला शाइदा खातून एवं अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शादाब इकबाल और आयुष राज ने पक्ष रखा। याचिका में आरोप लगाया गया कि महफूज अहमद के साथ पुलिस हिरासत में अमानवीय व्यवहार किया गया और घटना के बाद मामले को छिपाने का प्रयास किया गया।

मामले के अनुसार 1 मार्च 2025 को महफूज अहमद को नवाबाजार क्षेत्र से पुलिस ने हिरासत में लिया था। आरोप है कि हिरासत के दौरान उनके साथ मारपीट की गई। इसके बाद पांकी थाना में कांड संख्या 25/2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने उन्हें पलामू के सीजेएम न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उन्हें रिमांड पर लिया गया।

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पुलिस की ओर से अदालत में एक मेडिकल प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया था, जिसमें चोटिल होने के बावजूद युवक को “फिट फॉर कस्टडी” बताया गया था। हाईकोर्ट ने पहले भी इस मेडिकल रिपोर्ट और पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए थे तथा संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा था।

अब हाईकोर्ट के आदेश पर होने वाली न्यायिक जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि हिरासत में युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और पूरे मामले में किस स्तर पर लापरवाही या अनियमितता बरती गई। मामले की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता तय होगा।