झारखंड हाईकोर्ट ने 50 साल पुराने जमीन विवाद में याचिका खारिज की, मौखिक बंटवारे को माना वैध

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दुमका: झारखंड हाईकोर्ट ने करीब पांच दशक पुराने जमीन विवाद में भागीरथ कुमार और अन्य की याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने निचली अदालतों के फैसलों में हस्तक्षेप करने से इनकार किया। अदालत ने कहा कि परिवार के बीच जमीन का मौखिक बंटवारा पहले ही हो चुका था और संबंधित सदस्य लंबे समय से अपने-अपने हिस्से पर अलग कब्जे में थे।

मामला दुमका जिले के जरमुंडी थाना क्षेत्र के कन्हैयापुर गांव की जमीन से जुड़ा है। विवाद टाइटल पार्टिशन सूट संख्या 97/1975 से संबंधित था। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि जमीन उनके पूर्वजों के नाम संयुक्त रूप से दर्ज थी और परिवार में कोई कानूनी बंटवारा नहीं हुआ था।

सुनवाई के दौरान दूसरे पक्ष ने दलील दी कि कई दशक पहले परिवार में मौखिक रूप से जमीन का बंटवारा हो चुका था। हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद गवाहों के बयान और याचिकाकर्ताओं के स्वीकारोक्ति को महत्वपूर्ण माना।

अदालत ने पाया कि तीनों निचली अदालतों ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर समान निष्कर्ष दिया है। फैसलों में ऐसी कोई गंभीर कानूनी या तथ्यात्मक गलती नहीं मिली, जिसके आधार पर हाईकोर्ट हस्तक्षेप करे। इसके बाद याचिका खारिज कर दी गई।