रांची: झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार के Mining-Mining Development Amendment Act-2026 का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून से खनिज संपदा वाले राज्यों के राजस्व पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। वित्त मंत्री के अनुसार, इससे झारखंड को हर साल करीब 14 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है।


राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि कानून में जोड़े गए नए सेक्शन 9-D से खनिज और खनिजयुक्त भूमि पर राज्य सरकार के टैक्स या सेस लगाने के अधिकार सीमित हो सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ेगा। वित्त मंत्री ने GST से करीब 4 हजार करोड़ और VB-G रामजी योजना से करीब 8 हजार करोड़ रुपये के अतिरिक्त बोझ का भी उल्लेख किया।
उन्होंने 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले और झारखंड विधानसभा द्वारा पारित Minerals Bearing Land Cess Bill-2024 का हवाला देते हुए कहा कि राज्य को 2026-27 में करीब 14 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व की उम्मीद थी।
वित्त मंत्री ने यह भी दावा किया कि कोयला कंपनियों से झारखंड को करीब ₹1.36 लाख करोड़ की राशि अभी बकाया है। उन्होंने नए कानून को राजकोषीय संघवाद और राज्यों के हितों के लिए गंभीर चुनौती बताया।

